अब कछु नाथ न चाहिए मोरे : डॉ जंग बहादुर पांडेय

आरा के नौवा गांव में रामचरित मानस प्रचार मंडल के वार्षिकोत्सव में डॉ जंग बहादुर पांडेय ने राम कथा के माध्यम से भक्ति, समर्पण और ईश्वर कृपा का संदेश दिया।

News Aroma
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आरा : रामचरित मानस प्रचार मंडल भोजपुर आरा के 64 वें त्रिदिवसीय वार्षिक अधिवेशन का श्रीगणेश भोजपुर जिलांतर्गत नौवा ग्राम में बडे़ धूम धाम से शनिवार को हुआ। वार्षिकोत्सव का उद्घाटन करते हुए घरवासडीह मठिया के महंथ स्वामी नारायणाचार्य ने कहा कि राम कथा जग मंगल करनी। वहीं, डॉ जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि
राम कथा सुंदर करतारी।
संशय विहग उडावन हारी।

डॉ पाण्डेय ने कहा कि भक्त भगवान् से कुछ भौतिक पदार्थ नहीं चाहता, वह केवल उनकी कृपा का आकांक्षी होता है। केवट प्रभु श्रीराम का अनन्य भक्त है। प्रभु श्रीराम ने केवट से उतराई की पेशकस की लेकिन केवट ने यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि मुझे सब कुछ मिल गया, अब कुछ नहीं चाहिए. तुलसीदास ने प्रसंग की मार्मिक अभिव्यक्ति की है

पिय हिय की सिय जान निहारी।
मणि मुदरी मन मुदित उतारी।
कहेउ नाथ लेहु उतराई।
केवट चरण गहे अकुलाई।
नाथ आज मैं काह न पावा।
मिटे दोष दुख दारिद् दावा।
अब कछु नाथ न चाहिए मोरे।
दीन दयाल अनुग्रह तोरे।
बहुत कीन्ह करुणायतन, नहि कछु केवट लेई।
विदा कीन्ह प्रभु केवटहि, भक्ति विमल वर देई।
फिरती बार प्रभु जो कछु देवा।
सो प्रसाद मैं सिर धरि लेवा।

इस वार्षिकोत्स्व में अयोध्या के स्वामी नरहरिदासजी, जमानिया के डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय, देवघर की यशोमति, वाराणसी के ऋतेश महाराज, जबलपुर की मंजूषा शुक्ला, वाराणसी के डॉ संजय कृष्ण त्रिपाठी, प्रभृति विद्वानों और विदुषियों के मुखारविंद से राम कथा की मंदाकिनी प्रवाहित हो रही है, जिसमें श्रोतागण अवगाहन कर रहे हैं। इस अवसर पर डा राजेंद्र प्रसाद ने अपनी पुस्तक भगवान हनुमान मानस प्रचार मंडल के डॉ सत्यनारायण राय को भेंट की, जिसका श्रोताओं ने करतल ध्वनि से अनुमोदन किया।

इस अवसर पर अनेक गण मान्य अतिथियों डॉ जगनारायण तिवारी, डॉ महेंद्र कुमार राय, हरेंद्र कुमार राय, कृष्ण मुरारी पाण्डेय, जनेश्वर सिंह, मुक्तेश्वर उपाध्याय,बलिराम राय,रामाधार राय, मौआर, अनिल कुमार मिश्र की गरिमामयी उपस्थिति बनी रही।

आगत अतिथियों का भव्य स्वागत मंडल के अध्यक्ष डॉ हरि शंकर पाण्डेय ने, सुंदर संचालन डॉ सुदेश लाल और डॉ सत्यनारायण राय ने और धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्र राय एवं प्रो जग नारायण तिवारी ने किया। शांति पाठ और राष्ट्र गान से संगोष्ठी की पूर्णाहुति हुई।

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