
बिहार में NDA विधानमंडल दल के नेता आदरणीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा देने वाले हैं। चर्चा है कि वह 14 अप्रैल को सीएम पद से इस्तीफा देंगे और बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा। बिहार सरकार के वर्तमान उपमुख्यमंत्री, युवाओं के चहेते सम्राट चौधरी अभी भाजपा विधायक दल के नेता हैं। चूंकि, सीएम पद से इस्तीफा देते ही नयी सरकार का गठन और पुनः विधायक दल के नेता को चुनने की प्रक्रिया होनी है। चार माह पहले भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद सम्राट जी सरकार में नंबर-2 की भूमिका में थे। इस बार जो भी भाजपा विधायक दल के नेता होंगे, वह बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान यानी मामाजी को पर्यवेक्षक बनाया गया है। उम्मीद की जा रही है कि सम्राट चौधरी पुनः भाजपा विधायक दल के नेता और बिहार के अगले मुख्यमंत्री चुने जायेंगे। इनके इतर भी कई नाम बादल की तरह सोशल मीडिया के आसमान में आते हैं/लाये जाते हैं और कुछ देर के लिए छा जाते हैं, फिर अदृश्य हो जाते हैं। राजनीति में जैसे समर्थकों का कर्तव्य होता है कि ‘जीतने तक जीत और हारने तक हार न माने’, उसी तरह यहां विरोधी भी अपनी हर कोशिश और दांव आजमा लेना चाहते हैं। सबको इसका हक है। यही तो राजनीति है। बीते 30 मार्च से ‘सम्राट जी’ को रोकने की चाह में कुछ राजनीतिक जाति के लोगों ने तमाम कोशिशें की हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि सम्राट जी के चाहने वालों के सामने उनकी हैसियत पिद्दी भर की है।
जैसे हीरे की पहचान जोहरी को होती है, वैसे सम्राट चौधरी की पहचान भाजपा नेतृत्व को है। नेतृत्व की नजर से कुछ भी छिपा नहीं है। इसके साथ-साथ बिहार के विश्वकर्मा चाचाश्री नीतीश कुमार ने ऐसे ही सम्राट जी को आशीर्वाद थोड़े दिया है। नीतीश चाचा स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी को बिहार की तरक्की और खुशहाली के लिए समर्पित कर दिया। वह अपने बाद ऐसे आदमी को विकास की मशाल सौंपना चाहते थे, जो न कि सिर्फ कर्मठ हो, बल्कि राजनीतिक दांव-पेंच को भी समझता हो, आगे की चुनौतियों का मुकाबला कर सके। जैसे पत्रकार की चुनौती ‘बीट’ मिलने के बाद शुरू होती है। वैसे ही नेताओं के लिए चुनौती पद मिलने के बाद ही शुरू होती है। इसके लिए सम्राट जी ट्रायड एंड टेस्टेड हैं। सम्राट चौधरी को कमतर साबित करने के एजेंडे में जुटे लोग जब उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली पर ध्यान देंगे तो वो केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ के कॉम्बो नजर आयेंगे। ‘मुखियाजी’ ने बातचीत क्रम में इस ओर मेरा ध्यान आकृष्ट कराया। सम्राट जी का केशव जी की तरह संगठन के लोगों से भी जुड़ाव है और योगी जी की तरह प्रशासन को हैंडल करने की कड़क क्षमता भी उनमें है।
सम्राट जी नीतीश चाचा की तरह 24X7 राजनीति को भी जीते हैं। उसी में रमे होते हैं। नीतीश चाचा के द्वारा किये गये न्याय के साथ विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की योग्यता रखते हैं। दरअसल, इनके विरोधी घिसे-पिटे पुराने टेप रिकॉर्डर बजाने से पहले यह भूल जाते हैं कि जब ये चार माह पूर्व विधायक दल के नेता चुने जा रहे थे, तब भी ये वही सम्राट चौधरी थे। खैर अब तो 24 से 36 घंटे का समय शेष है, जब सबकुछ स्पष्ट हो जायेगा।
इसके बाद यह भी पता चल जायेगा कि मीडिया मंडी में सजी फटफ़टिया दुकानों ने किनका कितना एजेंडा सेट किया/परोसा। कौन सही बात कर रहे थे और कौन अपनी तरफ से भाजपा नेतृत्व को नाम थमा रहे थे। ध्यान देने वाली बात यह है कि बिहार में पहली बार भाजपा का सीएम जरूर बन रहा है, लेकिन वह NDA की सरकार का नेतृत्व करेगा। ऐसे में कॉमन सेंस की बात है कि नेता ऐसा होगा, जो सिर्फ बिहार ही नहीं गठबंधन को भी संभाल सके। साथ ही विपक्षियों को उसी की भाषा में जवाब दे सके। इस जिम्मेदारी के लिए एक ही नाम सबके दिमाग में आयेगा- वह हैं सम्राट चौधरी।

