
Ranchi Municipal Corporation Case: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम के प्रशासक की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए उन्हें 28 अप्रैल को कोर्ट में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश गौरव कुमार बेसरा द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने साफ कहा कि प्रशासक स्वयं उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि 22 जुलाई 2025 को दिए गए आदेश का अब तक पालन क्यों नहीं हुआ। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अगली तारीख पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
बार-बार मौका, फिर भी नहीं हुआ पालन
अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि पिछले एक साल में कई बार समय देने के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। 12 नवंबर, 3 दिसंबर, 9 दिसंबर 2025 के बाद 24 और 30 मार्च 2026 को भी निगम को अवसर मिला, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।
पहले नगर निगम की ओर से टाउन प्लानर और लीगल सेक्शन से जुड़ी व्यवस्था जल्द लागू करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी सख्ती
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 12 दिसंबर 2025 के एक आदेश पर रोक लगाई है, लेकिन हाईकोर्ट के अन्य आदेश अब भी लागू हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्देश भी दिया है।
इसी के मद्देनज़र हाईकोर्ट ने अब सीधे प्रशासक को जवाबदेह ठहराते हुए सख्त रुख अपनाया है।
अगली सुनवाई 28 अप्रैल
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सोनम ने निगम की देरी को कोर्ट के सामने रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अगली सुनवाई 28 अप्रैल को तय की गई है, जिसमें प्रशासक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

