
रांची : गुमला जिले के ट्रेजरी से वेतन मद में अवैध निकासी के आरोपों को लेकर उठे विवाद पर जिला प्रशासन ने अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने स्पष्ट किया है कि बड़े पैमाने पर किसी भी तरह की फर्जी निकासी की पुष्टि नहीं हुई है।
डीसी ने आरोपों को बताया निराधार
महालेखाकार (ऑडिट) की ओर से जताई गई आशंका के बाद वित्त विभाग ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद गुमला एसपी और जिला शिक्षा अधीक्षक से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। जांच के बाद गुमला एसपी ने साफ कहा कि पुलिस विभाग के वेतन मद में किसी भी तरह की अवैध निकासी नहीं हुई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फरवरी 2018 से अगस्त 2022 के बीच DDO Code GML/POL/004 के तहत किसी भी राशि का संबंधित बैंक खाते में ट्रांसफर नहीं हुआ।
शिक्षा विभाग के मामले में सामने आई गड़बड़ी
जिला शिक्षा अधीक्षक की जांच में शिक्षक धनेश्वर यादव से जुड़ा मामला सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, उनका तबादला अगस्त 2025 में सिमडेगा से गुमला किया गया था। इसके बाद अंतिम वेतन प्रमाण पत्र सितंबर 2025 में गुमला पहुंचा। इसी बीच दुर्गा पूजा से पहले वेतन भुगतान के सरकारी निर्देश के चलते एक प्रशासनिक गलती हो गई और सिमडेगा तथा गुमला—दोनों जगह से सितंबर 2025 का वेतन जारी हो गया। इस वजह से धनेश्वर यादव को एक महीने का वेतन दो अलग-अलग DDO कोड से मिल गया।
पैसे लौटाए गए, गलती स्वीकार
मामला सामने आने के बाद उनकी पत्नी ने अतिरिक्त मिले 79,040 रुपये चालान के जरिए सरकारी खाते में वापस जमा कर दिए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह भुगतान पति-पत्नी के संयुक्त बैंक खाते से जुड़ा था, जहां दोनों शिक्षक होने के कारण वेतन जमा होता था।
शिक्षक के निधन का भी उल्लेख
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि धनेश्वर यादव का निधन 15 अप्रैल 2026 को हो चुका है। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की रिपोर्ट ने जहां बड़े फर्जीवाड़े की आशंका को खारिज किया है, वहीं एक तकनीकी और प्रशासनिक गलती का मामला जरूर सामने आया है।

