
Satyendra Prasanna Sinha: सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा अंग्रेजी राज में बिहार और ओडिशा के पहले गवर्नर थे। साथ ही वे बंगाल के पहले एडवोकेट जनरल भी थे। वे पहले ऐसे भारतीय थे जो वायसरॉय की एक्जीक्यूटिव कौंसिल के सदस्य बने साथ ही वे ब्रिटिश मंत्रिमंडल के भी पहले भारतीय सदस्य थे।
सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा का जन्म रायपुर के बंगाली कायस्थ फैमिली में 1863 में हुआ। उनके पूर्वज लालचंद डे मिदनापुर से बीरभूम में आकर बसे थे और जीविका के लिए व्यवसाय करते थे। यहां उन्होंने गांव के चौधरी से जमींदारी खरीदी। उनके पिता बंगाली कायस्थ परिवार से आते थे। सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा की प्रारंभिक शिक्षा वीरभूम जिला स्कूल से हुई।
बाद में उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज कलकत्ता से पढ़ाई पूरी की। 1881 में वे उच्च शिक्षा के लिए भारत छोड़कर इंग्लैंड चले गए। वहां अपनी मेधाविता की वजह से प्रति वर्ष 50 पौंड की चार सालों के लिए स्कॉलरशिप मिल गयी। यहां उन्हें 100 पौंड प्रतिवर्ष की लिंकन स्कॉलरशिप भी मिली जो तीन वर्षों के लिए थी। 1886 में वे इंग्लैंड से बैरिस्टर बनकर भारत आ गए।
भारत आने के बाद उन्होंने कलकत्ता में लीगल प्रैक्टिस शुरू कर दी। वर्ष 1905 में उन्हें बंगाल का पहला एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया। बाद में कांग्रेस के बंबई अधिवेशन में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अध्यक्ष चुना गया। चार मार्च 1928 को बरहामपुर में उनका निधन हो गया।

