
रांची : पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में वट सावित्री पर्व और शनि देव जयंती श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष पूजा-अर्चना से हुआ। मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडेय ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ भगवान की पूजा संपन्न कराई। इस अवसर पर श्री राधा रानी का अलौकिक एवं आकर्षक श्रृंगार सफेद पोशाक एवं जड़ित आभूषणों से किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंदिर में सजे दिव्य दरबार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूजा-अर्चना के दौरान भगवान को लड्डू, मेवा, फल एवं वेजिटेबल खिचड़ी का विशेष भोग अर्पित किया गया। साथ ही शनि देव जयंती के अवसर पर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से हनुमान चालीसा का पाठ कर शनि दोष से मुक्ति एवं सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर परिसर जय श्री राम और जय शनिदेव के जयकारों से गूंज उठा। इसके पश्चात सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दीपों की रोशनी, घंटियों की मधुर ध्वनि और भक्तिमय वातावरण ने सभी को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। महाआरती के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। सभी भक्तों ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण किया।कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने वट सावित्री पर्व एवं शनि देव जयंती के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि वट सावित्री पर्व भारतीय संस्कृति में अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं शनि देव जयंती न्याय, कर्म और धर्म के महत्व का संदेश देती है।उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व समाज में आस्था, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। ऐसे आयोजनों से समाज में सेवा, संस्कार और एकता की भावना को बढ़ावा मिलता है।

