
-दयानंद राय
रांची : झारखंड में आसन्न राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिसमें एक तरफ सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल मैदान में होंगे, जबकि दूसरी ओर भाजपा मुकाबले में रहेगी।
इसी बीच राज्यसभा सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और झामुमो के बीच प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि दो सीटों में से एक सीट पर उसका अधिकार बनता है, जबकि झामुमो दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के संकेत दे रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में सीटों पर उम्मीदवारी को लेकर पार्टी गठनबंधन के घटक दलों के साथ बैठकर उम्मीदवार तय करेगी। बैठक में सबकी सुनी जायेगी और इसके बाद कुछ भी तय होगा। इधर, राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने कहा कि राजद झारखंड में गठबंधन का हिस्सा है और पार्टी गठबंधन के धर्म का पालन करेगी। हालांकि, कांग्रेस राज्यसभा की दो सीटों में से एक पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती है। इसके संकेत पार्टी दे चुकी है।
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी राज्यसभा की एक सीट की मांग करेगी। उनका कहना था कि बीते तीन राज्यसभा चुनावों में गठबंधन केवल एक सीट जीतने की स्थिति में था, इसलिए सीट झामुमो को जाती रही। लेकिन इस बार गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक संख्या बल मौजूद है।
राजू ने कहा कि इस बार हमारे पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बल है, इसलिए एक सीट मांगना हमारा अधिकार है। हम जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे।
दरअसल, जून 2026 में झारखंड की दो राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनमें एक सीट शिबू सोरेन के पिछले वर्ष निधन के बाद रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट पर भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अगर विधानसभा में संख्या बल की बात करें तो 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और वाम दलों के 2 विधायक शामिल हैं। वहीं, भाजपा और उसके सहयोगियों की संख्या इससे काफी कम है।
संख्या बल को देखते हुए दोनों सीटों पर इंडिया गठबंधन की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन उम्मीदवारों और सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। इससे चुनाव को दिलचस्प मोड़ मिलने की संभावना बढ़ गई है। इधर, राज्यसभा चुनाव में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी के उतरने की भी चर्चाएं हैं। वे पहले भी झारखंड से राज्यसभा जा चुके हैं। ऐसे संकेत हैं कि भाजपा उन्हें समर्थन दे सकती है। पर दिक्कत ये है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल अपने बूते प्रत्याशी नहीं जीता सकते। भाजपा, जदयू, लोजपा और आजसू को मिलाकर विधानसभा में विधायकों का आंकड़ा महज 24 होता है। जबकि जीत के लिए 28 विधायकों के प्रथम वरीयता का मत आवश्यक है। ऐसे में नथवाणी की उपस्थिति से सत्तारूढ़ खेमे में सेंधमारी कर सीट निकालने की भरसक कोशिश होगी। परिमल नथवाणी पहले भी झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। उद्योग जगत में उनकी मजबूत पहचान है और राज्य के कई राजनीतिक दलों के नेताओं से उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं। यही वजह है कि उन्हें केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का भी समर्थन मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

