झारखंड में शिक्षा सुधार की बड़ी कवायद: BNR चाणक्य में कुलपति सम्मेलन, राज्यपाल ने खोली सिस्टम की पोल!

रांची में कुलपति सम्मेलन-2026 में उच्च शिक्षा सुधार पर मंथन, राज्यपाल ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई और सुधार के लिए तेलंगाना व तमिलनाडु का उदाहरण दिया।

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रांची : रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से दो दिवसीय कुलपति सम्मेलन-2026 का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में राज्यपाल संतोष गंगवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सचिव राहुल पुरवार समेत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति और यूजीसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।  सम्मेलन में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने को लेकर कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

नए विश्वविद्यालय अधिनियम पर खास फोकस

बैठक में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 और उसके तहत होने वाले शिक्षा सुधारों पर विशेष मंथन किया गया। राज्य में नामांकन प्रक्रिया, शैक्षणिक कैलेंडर, परीक्षा व्यवस्था और मूल्यांकन प्रणाली को एक समान और पारदर्शी बनाने पर भी चर्चा हुई। विश्वविद्यालयों के प्रशासन को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुलपतियों और अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्यों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। इसके साथ ही छात्रवृत्ति योजनाओं के बेहतर संचालन और ओपन डिस्कशन के जरिए छात्रों की समस्याओं के समाधान पर भी विचार हुआ।

राज्यपाल का बड़ा बयान

राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा की स्थिति में झारखंड काफी पीछे है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बात पहले भी कही थी, जिस पर कुछ लोगों ने आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि यह दो दिवसीय कार्यक्रम इसी दिशा में सुधार की कोशिश है और इसके नतीजे बाद में सामने आएंगे। राज्य का भविष्य शिक्षा संस्थानों में ही तय होता है। राज्यपाल ने तेलंगाना और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों की उच्च शिक्षा व्यवस्था बेहतर है। उन्होंने ड्रॉपआउट की समस्या और छात्रों के बेहतर शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में पलायन पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की पहचान सिर्फ उनके भवनों से नहीं, बल्कि उनके शैक्षणिक माहौल और उपलब्धियों से होती है। उन्होंने नियमित शैक्षणिक कैलेंडर, रिसर्च, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर छात्र गर्व से अपनी यूनिवर्सिटी का नाम लें और दूसरे राज्यों के छात्र यहां पढ़ने आएं, तभी असली बदलाव माना जाएगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।