भारत में गोरा बनने की चाह, अमेरिका में सांवली त्वचा का क्रेज

Manu Shrivastava
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भारत में जहां लोग गोरी त्वचा पाने के लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स, फेयरनेस क्रीम और स्किन ट्रीटमेंट्स का सहारा लेते हैं, वहीं अमेरिका और पश्चिमी देशों में लोग अपनी त्वचा को जानबूझकर सांवला बनाने पर लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। वहां “टैनिंग” का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और इसे स्टाइल व आकर्षण का प्रतीक माना जाता है।

अमेरिका में क्यों बढ़ रहा है टैनिंग का क्रेज?

अमेरिका में टैनिंग इंडस्ट्री अरबों डॉलर का कारोबार बन चुकी है। लोग सनबाथ, टैनिंग बेड, स्प्रे टैनिंग और आर्टिफिशियल यूवी रेज की मदद से अपनी त्वचा को ब्रॉन्ज्ड या डार्क ब्राउन लुक देते हैं। खासकर गर्मियों के मौसम में इसका क्रेज और बढ़ जाता है। युवा-युवतियां, मॉडल्स, एक्टर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स इस ट्रेंड को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं। पश्चिमी देशों में टैन्ड स्किन को हेल्दी, आकर्षक और फैशनेबल माना जाता है।

सेलिब्रिटीज से बढ़ा ट्रेंड

हॉलीवुड और फैशन इंडस्ट्री ने भी इस ट्रेंड को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। किम कार्दशियन और जेनिफर लोपेज जैसी सेलिब्रिटीज का ब्रॉन्ज्ड लुक युवाओं के बीच बेहद पसंद किया जाता है। लोग मानते हैं कि हल्की गोरी त्वचा पर टैनिंग ज्यादा आकर्षक दिखाई देती है। एक अमेरिकी टैनिंग सैलून की मालकिन के अनुसार, सर्दियों में भी उनके यहां ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। इससे साफ है कि पश्चिमी देशों में सांवली त्वचा अब फैशन और ग्लैमर का हिस्सा बन चुकी है।

 

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