
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत का मानना है कि बदलते दौर में फिल्म इंडस्ट्री को भी खुद को लगातार विकसित करना होगा। आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि आज का दर्शक ऐसी कहानियां देखना चाहता है, जिनसे वह खुद को जोड़ सके। उनके अनुसार, यदि सिनेमा समय की जरूरतों और समाज में हो रहे बदलावों को नहीं समझेगा, तो दर्शकों के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता कमजोर पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्मों को प्रासंगिक बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है।
कलाकारों की फीस पर उठते सवालों पर दिया जवाब
इंटरव्यू के दौरान कंगना से पूछा गया कि क्या बड़े सितारों की भारी-भरकम फीस फिल्मों के नुकसान की वजह बन रही है। इस पर उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं करती, तो उसके हर खर्च की समीक्षा शुरू हो जाती है। ऐसे समय में कलाकारों की फीस से लेकर निर्माण लागत तक हर पहलू पर चर्चा होना स्वाभाविक है। कंगना ने इसकी तुलना एक परिवार की आर्थिक स्थिति से करते हुए कहा कि जब आय कम होती है, तो लोग गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में भी यही स्थिति लागू होती है।
दर्शकों से जुड़ाव ही सफलता की कुंजी
कंगना ने कहा कि फीस का मुद्दा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि फिल्में दर्शकों की बदलती पसंद को समझें। उन्होंने कहा कि समाज, सोच और मनोरंजन के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए फिल्मों को भी नए विचारों और नई कहानियों के साथ आगे बढ़ना होगा।
स्मिता तांबे ने बताई अच्छी कहानी की ताकत
कंगना की को-स्टार स्मिता तांबे ने भी इस विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दर्शक उन कहानियों से ज्यादा जुड़ते हैं, जिनमें उन्हें अपने जीवन की झलक दिखाई देती है। स्मिता के अनुसार, उनकी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ आम लोगों, महिलाओं, मांओं, नर्सों और कामकाजी वर्ग के संघर्षों और भावनाओं को सामने लाएगी, जिससे दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत होगा।

