
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री माधुरी दीक्षित पिछले कई दशकों से अपनी शानदार अदाकारी और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करती आ रही हैं। हर दौर में अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने खुद को एक बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया है। इन दिनों वह अपनी नई फिल्म मां बहन को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म के माध्यम से वह न सिर्फ मनोरंजन कर रही हैं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाने का प्रयास कर रही हैं।
मनोरंजन के जरिए संदेश देना सबसे प्रभावी तरीका
फिल्म और समाज के रिश्ते पर अपने विचार साझा करते हुए माधुरी ने कहा कि किसी भी जरूरी संदेश को लोगों तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम मनोरंजन है। उनके अनुसार, जब दर्शक कोई फिल्म या शो देखने बैठते हैं तो उनका उद्देश्य कुछ समय के लिए तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर होकर अच्छा समय बिताना होता है। ऐसे में यदि कहानी के भीतर समाज की सच्चाइयों और जरूरी मुद्दों को सहज तरीके से प्रस्तुत किया जाए, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा होता है।
उन्होंने कहा कि मनोरंजन के साथ दिया गया संदेश लोगों के दिल और दिमाग तक आसानी से पहुंचता है। यही वजह है कि फिल्मों और वेब शोज़ की ताकत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बन सकते हैं।
उपदेश नहीं, दिलचस्प कहानियां ज्यादा असर छोड़ती हैं
माधुरी दीक्षित का मानना है कि किसी बात को बार-बार समझाने या उपदेश देने से लोग कई बार उससे दूरी बनाने लगते हैं। लेकिन जब वही बात रोचक और मनोरंजक अंदाज में दिखाई जाती है, तो दर्शक उसे ध्यान से देखते हैं और उस पर विचार भी करते हैं।
अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें ऐसी कहानियां पसंद हैं, जिनमें मनोरंजन के साथ कोई सार्थक संदेश भी छिपा हो। उनका मानना है कि हंसते-हंसाते हुए समाज की वास्तविकता को दिखाना लोगों पर ज्यादा प्रभाव छोड़ता है और उन्हें सोचने के लिए प्रेरित करता है।
पितृसत्तात्मक सोच और दोहरे मापदंडों पर उठाए सवाल
बातचीत के दौरान माधुरी ने समाज में महिलाओं और पुरुषों के प्रति अलग-अलग नजरिए पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हमारा समाज आज भी काफी हद तक पितृसत्तात्मक सोच से प्रभावित है, जहां रिश्तों और प्यार के मामलों में दोहरे मापदंड देखने को मिलते हैं।
उनके अनुसार, यदि कोई पुरुष कई रिश्ते बनाता है तो उसे सामान्य रूप से स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन यदि कोई महिला वैसा ही करती है तो उसे आलोचना और नकारात्मक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। माधुरी का मानना है कि समय के साथ इन पुरानी सोच और धारणाओं को बदलने की जरूरत है।
महिलाओं को मजबूत रूप में पेश करती है ‘मां बहन’
माधुरी ने बताया कि उनकी फिल्म ‘मां बहन’ इन्हीं पारंपरिक नियमों और सामाजिक धारणाओं को चुनौती देती है। फिल्म में महिलाओं को मजबूत, आत्मनिर्भर और रूढ़ियों को तोड़ने वाले किरदारों में दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि हर महिला सम्मान, स्वतंत्रता और गरिमा के साथ जीवन जीने की हकदार है।
फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने किया है। इसमें रफीफ के अलावा तृप्ति डिमरी, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज भी अहम किरदार में नजर आ रहे हैं। यह फिल्म दर्शकों के लिए नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध हो रही है।

