
रांची : दुमका में करोड़ों रुपए के मूल्य वाले पहाड़िया और आदिवासी समुदाय की जमीनों को हजारों रुपए में खरीद कर पत्थर कारोबारी इनसे एकरारनामा करा रहे हैं। इसी तरह पत्थर खदान के दलालों की ओर से माफिया से मिली-भगत कर जमीन का एग्रीमेंट करवाया जाता है। लीज होने के बाद इनकी जमीन पर खनन शुरू किया जाता है। खदान में खनन शुरू होने के बाद पत्थर दलाल और खदान मालिक करोड़ों रुपए कमा कर बंगाल चले जाते हैं। वहीं, झारखंड के स्थानीय दलाल जमीन मालिक के पैसे भी गबन कर लेते हैं। दुमका जिले में चल रहे पत्थर खदानों के रैयत आदिवासी भाइयों के घर जाकर देखेंगे तब आपको पता चलेगा जिनकी जमीनों से करोड़ों रुपए के सरकार को राजस्व प्राप्त होते हैं और खदान मलिक करोड़ों रुपए कमाते हैं उनकी घर मिट्टी के हैं। आज भी इन्हें गरीबी कुपोषण और विकास की धीमी गति जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हम बात कर रहे हैं दुमका जिला के गोपीकांदर, शिकारीपाड़ा क्षेत्र में चल रहे पत्थर खदानों की जहां प्रतिदिन करोड़ों रुपए के पत्थर निकाले जाते हैं। शिकारीपाड़ा के सालबोना मोजा में पत्थर माफिया स्थानीय पत्थर दलालों की मिली भगत से करोड़ों रुपए की जमीन आदिवासी भाइयों से कम दरों पर लेकर लीज करा कर खनन कर रहे हैं । वहीं सरकार के बनाए गए नियम की धज्जियां प्रतिदिन खदान संचालक उड़ाते हैं प्रतिदिन खदानों में नियम से 50 गुना अधिक खनन प्रति खदान में किया जाता है। पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट के रहने वाले पत्थर माफिया प्रतिदिन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

