
नई दिल्ली : चंडीगढ़ के ऐतिहासिक कैपिटल प्रोजेक्ट से जुड़े और प्रसिद्ध वास्तुकार पियरे जेनेरेट द्वारा डिज़ाइन किए गए विरासत फर्नीचर की सात वस्तुएं बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आयोजित नीलामी में लगभग 1.6 करोड़ रुपये में बिक गईं। यह बिक्री उस समय हुई जब विरासत संरक्षण कार्यकर्ता अजय जग्गा ने नीलामी से दो दिन पहले ही केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों को इसकी जानकारी देकर हस्तक्षेप की मांग की थी। 18 जून को आयोजित नीलामी में कुल 13 लॉट में शामिल फर्नीचर में से सात वस्तुएं 1,60,938 यूरो (करीब 1.61 करोड़ रुपये) में बिकीं। इन वस्तुओं को फ्रांसीसी नीलामी संस्था PIASA द्वारा बिक्री के लिए रखा गया था।
चंडीगढ़ हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने 16 जून को केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर नीलामी रुकवाने के लिए तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की थी। हालांकि, इसके बावजूद नीलामी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हो गई। नीलामी के बाद भेजे गए एक अन्य पत्र में जग्गा ने निराशा जताते हुए पूछा कि पूर्व सूचना मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि वर्षों से चंडीगढ़ की विरासत फर्नीचर सार्वजनिक संस्थानों से गायब होकर अंतरराष्ट्रीय नीलामी घरों और निजी संग्रहों तक पहुंच रही है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी तंत्र दिखाई नहीं देता।
नीलामी सूची में बिके फर्नीचर का संबंध चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों, पंजाब यूनिवर्सिटी और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बताया गया था। जग्गा ने स्पष्ट किया कि “प्रशासनिक भवन” शब्द केवल चंडीगढ़ प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, हरियाणा, यूटी प्रशासन, पंजाब विश्वविद्यालय, पीईसी, हाईकोर्ट और पीजीआईएमईआर जैसे संस्थानों को भी शामिल करता है।
उन्होंने मांग की कि नीलाम हुई वस्तुओं की उत्पत्ति और उनके संस्थानों से बाहर निकलने की पूरी जांच कराई जाए। साथ ही विदेशों में भारतीय दूतावासों के लिए स्थायी अलर्ट प्रणाली विकसित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी नीलामियों का समय रहते विरोध किया जा सके। उन्होंने चंडीगढ़ में शेष बचे जेनरेट और ले कोर्बुज़िए द्वारा डिज़ाइन किए गए फर्नीचर को ‘आर्ट ट्रेजर’ घोषित करने की भी मांग की, ताकि उनके निर्यात और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

