
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सात-दिवसीय परिवर्तनीय दर रेपो (वीआरआर) नीलामी के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में मंगलवार को 1,41,171 करोड़ रुपये डाले। आरबीआई की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह धनराशि 5.26 प्रतिशत की ‘कट-ऑफ’ और भारित औसत पर डाली गई। यह कदम ऐसे समय उठाया गया, जब बैंकिंग प्रणाली में नकदी 21 जून के 30,685.11 करोड़ रुपये के अधिशेष से घटकर 22 जून को 19,971.89 करोड़ रुपये के घाटे में चली गई। वीआरआर नीलामी आरबीआई का एक माध्यम है, जिसके जरिये वह बैंकिंग प्रणाली में नकदी की अस्थायी कमी या अधिकता को संतुलित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नकदी में यह कमी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) भुगतान के कारण बैंकिंग प्रणाली से धन की निकासी के चलते आई है। नकदी के घाटे में जाने से ओवरनाइट मनी मार्केट दरों पर दबाव बढ़ा है, जहां भारित औसत कॉल मनी दर 5.43 प्रतिशत पर रही, जो आरबीआई की रेपो दर से 0.18 प्रतिशत अधिक है।
इसी तरह, ट्राइ-पार्टी रेपो (टीआरईपीएस) दरें भी नीतिगत ब्याज दर से 0.05-0.07 प्रतिशत अधिक पर कारोबार कर रही थीं। अग्रिम कर भुगतान के कारण हुए धन निकासी से उत्पन्न दबाव के कारण केंद्रीय बैंक लगातार बैंकिंग प्रणाली में अस्थायी नकदी डाल रहा है। नकदी दबाव को कम करने और ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्रीय बैंक ने पिछले कुछ दिनों में विभिन्न अवधियों की वीआरआर नीलामी के जरिये करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये की अस्थायी नकदी डाली है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई ने सोमवार को ओवरनाइट वीआरआर के जरिये 36,300 करोड़ रुपये, शुक्रवार को तीन-दिवसीय वीआरआर नीलामी के माध्यम से 16,750 करोड़ रुपये, बुधवार को दो वीआरआर नीलामियों के जरिये 72,300 करोड़ रुपये, 16 जून को सात-दिवसीय वीआरआर नीलामी में 89,440 करोड़ रुपये और 15 जून को ओवरनाइट वीआरआर नीलामी के जरिये 28,220 करोड़ रुपये डाले।

