


चंडीगढ़ : कांग्रेस ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह ‘‘गबन’’ हिंदुओं की आस्था पर हमला है और यह कृत्य करने वालों ने महमूद गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया है। शुक्रवार को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के साथ यहां प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) सिर्फ दिखावा है।





उन्होंने कहा कि इस घटना ने न केवल हिंदुओं को, बल्कि भगवान राम में गहरी आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों को भी बहुत आहत किया है और शायद इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है। श्रीनेत ने कहा, ‘‘यह सिर्फ धोखाधड़ी या करोड़ों रुपयों के गबन का मामला नहीं है। यह हिंदुओं की आस्था और उनके विश्वास पर हमला है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई को इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि एसआईटी की जांच को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सिर्फ छोटी मछलियों को ही गिरफ्तार किया गया है, जबकि बड़ी मछलियों को छोड़ दिया गया है।’’
श्रीनेत ने कहा कि जिन लोगों ने दान के पैसे का ‘‘गबन’’ किया, उन्होंने ‘‘महमूद गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया है’’।
उन्होंने हिंदुत्व के स्वयंभू संरक्षकों को धर्म के लिए ‘‘कलंक’’ करार दिया। इतिहास की किताबों के अनुसार, महमूद गजनवी एक आक्रांता था जिसने गुजरात में सोमनाथ मंदिर की संपत्ति लूटी। श्रीनेत ने दावा किया, ‘‘भाजपा और आरएसएस ने राम मंदिर के प्रबंधन के लिए बनाए गए ट्रस्ट में अपने सदस्यों को भर दिया है। एसआईटी जांच की प्रगति को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? बड़े लोगों को क्यों नहीं पकड़ा गया? शक के दायरे में आए लोगों को क्यों नहीं पकड़ा गया? प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?’
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मामले पर अपनी ‘‘चुप्पी’’ तोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर यह सब कुछ समय से चल रहा था और उन्हें इसके बारे में कुछ पता नहीं चला, तो यह सरकार की नाकामी को दिखाता है। और अगर उन्हें इसके बारे में पता था और उन्होंने कुछ नहीं किया, तो वे भी इस पाप में शामिल हैं।’’ हरियाणा कांग्रेस मुख्यालय में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने भी मंदिर चढ़ावा के मुद्दे पर पत्रकारों से बात की और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की।
श्रीनेत और गोहिल ने मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की भी मांग की।
