
- हॉस्पिटल में इलाजरत मरीज और उनके परिजनों पर मंडरा रहा डेंगू का खतरा
- अस्पताल के बेसमेंट में है आइसोलेशन वार्ड, गंभीर मरीजों का होता है इलाज
- राजधानी रांची में तेजी से बढ़ रहे हैं डेंगू मलेरिया के मामले
रांची: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) में ही डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां बांटने का पूरा इंतजाम है। अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण आज पूरा परिसर मच्छरों का ब्रीडिंग ग्राउंड बन चुका है, जिससे यहां इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों पर भी डेंगू मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद रिम्स प्रबंधन का ध्यान इस ओर नहीं है
जलजमाव से प्रशासन बेखबर
राजधानी रांची में इन दिनों डेंगू और मलेरिया के मामले तेजी से पैर पसार रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन सबसे ज्यादा सतर्क रहेंगे। लेकिन रिम्स की जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। अस्पताल के बेसमेंट से लेकर छत तक जगह-जगह हफ्तों से पानी जमा है। इस ठहरे हुए साफ पानी में डेंगू के मच्छर तेजी से पनप रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति अस्पताल के बेसमेंट की है। रिम्स के इसी बेसमेंट में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जहां बेहद गंभीर मरीजों को रखकर उनका इलाज किया जाता है। एक तरफ जहां कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ वार्ड के ठीक आसपास फैला जलजमाव और मच्छरों का आतंक उन्हें नई बीमारियों का शिकार बना रहा है।
मरीजों और तीमारदारों की जान आफत में
अस्पताल में भर्ती मरीज पहले से ही अपनी बीमारियों से जूझ रहे हैं, और अब उनके सिर पर डेंगू का अतिरिक्त खतरा मंडराने लगा है। मरीजों की देखभाल के लिए चौबीसों घंटे अस्पताल में रुकने वाले परिजनों का कहना है कि यहां दिन हो या रात मच्छरों का प्रकोप इतना ज्यादा है कि स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ जाए। अस्पताल परिसर में न तो नियमित रूप से फॉगिंग कराई जा रही है और न ही जमा पानी को निकालने के कोई ठोस उपाय किए जा रहे हैं।
रांची में डेंगू के बढ़ते आंकड़ों के बीच रिम्स की यह बदहाली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही है। जो अस्पताल लोगों को जिंदगी बचाने के लिए जाना जाता है, वहीं आज लापरवाही के कारण बीमारियों का केंद्र बनता जा रहा है। गंभीर मरीजों के वार्ड के पास इस तरह का जलजमाव प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। और सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि रिम्स में ही मलेरिया पर रिसर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद वहां पर इस तरह की अव्यवस्था समझ से परे है। इतना ही लोगों के घर घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम भी हॉस्पिटलों पर ध्यान नहीं दे रही है।

