
रांची: आजसू ने JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) विज्ञापन संख्या 01/2026 के परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों में बढ़ रही नाराजगी और लगातार उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री और JPSC के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा है। आजसू के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि परिणाम जारी होने के बाद से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इसकी पारदर्शिता, वैधता, श्रेणीवार कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में केवल 16 दिनों के भीतर मेंस परीक्षा कराना अभ्यर्थियों के साथ न्यायसंगत नहीं होगा।
ज्ञापन में रखीं कई अहम मांगें
आजसू ने अपने ज्ञापन में आयोग और राज्य सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संगठन का कहना है कि जब तक पीटी परीक्षा के परिणाम से जुड़ी सभी आपत्तियों और संदेहों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक मेंस परीक्षा स्थगित की जानी चाहिए। संगठन ने यह भी मांग की है कि पीटी परिणाम की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएं और सभी श्रेणियों-ST, SC, OBC-I, OBC-II और EWS का अलग-अलग कट-ऑफ सार्वजनिक किया जाए। इसके अलावा अंतिम उत्तर अभ्यर्थियों की रैंकिंग और मेरिट सूची भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। आजसू का कहना है कि परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही इसमें यदि किसी बाहरी एजेंसी की भूमिका रही है तो उसे भी स्पष्ट किया जाए और आयोग की जवाबदेही तय की जाए।
संगठन ने चयनित अभ्यर्थियों की संख्या, रिक्तियों के अनुपात और अतिरिक्त चयन के आधार पर आयोग से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करने की भी मांग की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही OMR शीट और परिणाम से जुड़ी शिकायतों की जांच कर आयोग से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने की भी बात कही गई है। आजसू ने परिणाम में कथित क्रमांक संबंधी विसंगतियों और अन्य तकनीकी त्रुटियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही पीटी और मेंस परीक्षा के बीच बेहद कम समय दिए जाने के फैसले पर आयोग से अपना मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और निर्णय का आधार सार्वजनिक करने की अपील की है।
पारदर्शिता से ही बनेगा अभ्यर्थियों का भरोसा
प्रदेश सचिव सक्षम झा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी चयन प्रक्रिया का निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और JPSC को अभ्यर्थियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम भी उठाने चाहिए। वहीं, प्रदेश सचिव राजेश सिंह ने कहा कि जब तक परिणाम को लेकर उठ रहे सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक मेंस परीक्षा आयोजित नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा होगी और आयोग की निष्पक्षता पर लोगों का भरोसा भी कायम रहेगा।

