
रांची : गोस्सनर कॉलेज के मानवशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का बुधवार को सफल समापन हुआ। 21 और 22 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक प्रावधान व समस्याएं” था। संगोष्ठी में आदिवासी समाज की पहचान, उनके संवैधानिक अधिकार, पारंपरिक ज्ञान और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. मुर्मू के स्वागत भाषण से हुई। मुख्य अतिथि बिशप सीमांत तिर्की ने कहा कि आदिवासी समुदाय जल, जंगल और जमीन का सच्चा संरक्षक है। उन्होंने बताया कि यह समाज लंबे समय से प्रकृति संरक्षण में अहम भूमिका निभाता आ रहा है। साथ ही उन्होंने विस्थापन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
दूसरे दिन प्रो. डॉ. एस.एन. मुंडा ने आदिवासी पारंपरिक ज्ञान को पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया। समापन सत्र में प्रो. जोसेफ बारा ने भारतीय राष्ट्रवाद और संविधान निर्माण में आदिवासी समाज के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में प्रो. योताम कुल्लू ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

