रिम्स में 475 रुपए में होगी अर्थराइटिस की जांच, निजी लैब में चुकाने पड़ते हैं 4500

रिम्स में अब HLA-B27 जांच सिर्फ 475 रुपये में उपलब्ध, गठिया और ऑटोइम्यून बीमारी की पहचान होगी आसान। जानें टेस्ट की प्रक्रिया, फायदे और मरीजों को मिलने वाली राहत।

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रांची: झारखंड और बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब केवल रिम्स में मरीजों को अर्थराइटिस (गठिया) की बेहद खास HLA-B27 जांच की सुविधा मिलने लगी है। शरीर में जकड़न, जोड़ों के दर्द और खून के प्रवाह में रुकावट की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है। रिम्स के लैब मेडिसिन विभाग में हाल ही में आरटीपीसीआर मशीन स्थापित की गई है, जिससे यह जांच बेहद कम खर्च में संभव है।

रिम्स में इस जांच के लिए मरीजों को केवल 475 रुपए शुल्क देना होता है, जबकि निजी लैब में इसी HLA-B27 टेस्ट के लिए 4,000 से 4,500 तक खर्च करने पड़ते हैं। दरअसल निजी लैब अमूमन मरीजों के ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए देश के बड़े महानगरों में भेजते हैं, जिससे रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। वहीं रिम्स में अपनी लैब होने के कारण यह प्रक्रिया बेहद तेजी से पूरी की जाती है। ब्लड सैंपल से डीएनए अलग कर जांच की पूरी प्रक्रिया में मात्र डेढ़ घंटे का समय लगता है, जिसके बाद विस्तृत विश्लेषण करके रिपोर्ट तैयार कर ली जाती है।

लैब इंचार्ज के अनुसार यदि रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो इसका मतलब है कि रक्त में HLA-B27 प्रोटीन मौजूद नहीं है और बीमारी की संभावना कम है। वहीं रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर जेनेटिक प्रोटीन की उपस्थिति का पता चलता है। यह जांच शरीर में ऑटोइम्यून रोगों की समय रहते पहचान करने, रीढ़ व जोड़ों के इलाज तथा आंखों की सूजन व पुराने दर्द के सही कारण का पता लगाने में काफी मददगार साबित हो रही है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।