
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रश्नपत्र लीक रोधी कानून में संशोधन करने वाले विधेयक के लोकसभा से पारित होने का स्वागत किया है। उन्होंने कड़े दंड प्रावधानों वाले इस विधेयक को भारतीय युवाओं की आकांक्षाओं की रक्षा की दिशा में एक “मजबूत कदम” बताया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई को लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया था। यह विधेयक कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर हुए बड़े छात्र प्रदर्शनों के कुछ दिनों बाद लाया गया। इन प्रदर्शनों के कारण धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। लोकसभा ने बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दे दी। इस दौरान सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि वह “अनुभवों से सीखने के लिए तैयार” है।
मुख्यमंत्री खांडू ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 का पारित होना करोड़ों भारतीय युवाओं की आकांक्षाओं की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है।” उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अपना संकल्प स्पष्ट कर दिया है। जो लोग प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल और परीक्षा धोखाधड़ी के माध्यम से हमारे युवाओं के भविष्य से समझौता करेंगे, उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।” केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच प्रश्नपत्र लीक रोधी कानून में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया था। इस विधेयक में 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये के जुर्माने जैसे कड़ी सजा का प्रावधान शामिल हैं। इस दौरान विपक्ष 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में संसद मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब की मांग कर रहा था।

