सीमा की शानदार वापसी, राष्ट्रमंडल खेलों में जीता कांस्य पदक

गर्भावस्था के बाद गठिया और चोट से उबरकर सीमा कालीरमण ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिला चक्का फेंक स्पर्धा का कांस्य पदक जीता। उनका संघर्ष और वापसी प्रेरणादायक रही।

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ग्लास्गो: भारत की सीमा कालीरमण को गर्भावस्था के बाद गठिया हो गया था लेकिन उन्होंने इस पर काबू पाया और पिछले साल वापसी करने के बाद यहां राष्ट्रमंडल खेलों में में बृहस्पतिवार को महिला चक्का फेंक स्पर्धा में कांस्य पदक जीता लेकिन वह अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से मामूली अंतर से चूक गईं। उनकी साथी खिलाड़ी निधि रानी इसी स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहीं। सीमा ने 58.65 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। भारतीय खिलाड़ी ने यह दूरी अपने तीसरे प्रयास में हासिल की। वह हालांकि 59.73 मीटर के अपने निजी और सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से पीछे रहीं। निधि ने 57.10 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ चौथा स्थान हासिल किया। उनका निजी और सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 58.82 मीटर है।

जमैका की समंथा हॉल ने अपने पांचवें प्रयास में 61.66 मीटर की सर्वश्रेष्ठ दूरी के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया जबकि कनाडा की जूलिया टंक्स ने 60.67 मीटर के प्रयास के साथ रजत पदक जीता। सीमा ने कहा, ‘‘मैं अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तो नहीं कर पाई, लेकिन अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध थी।’’ हरियाणा के भिवानी की रहने वाली 27 वर्षीय सीमा ने गर्भावस्था के बाद गठिया और घुटने की चोट जैसी जटिल समस्याओं से उबरने के लिए कुछ समय तक खेल से दूर रहने के बाद वापसी की। उनका बेटा अब चार साल का है।

सीमा भिवानी के चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा में पीएचडी भी कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘गर्भावस्था के बाद मुझे गठिया हो गया था, जिसके कारण कई समस्याएं पैदा हो गई थी। अपने पति और परिवार के सहयोग से ही मैं आज यहां पर हूं।’’ सीमा ने कहा, ‘‘मुझे पूरा भरोसा था कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद मैं अच्छा प्रदर्शन करूंगी। बहुत ठंड थी, लेकिन स्पला (पोलैंड) में खेलों से पहले अभ्यास करने से हमें ऐसे मौसम के लिए तैयार करने में मदद की।’’ अपने भविष्य के लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर सीमा ने कहा, ‘‘ मेरा कोई विशिष्ट लक्ष्य नहीं है। मैं केवल अच्छा प्रदर्शन करना चाहती हूं, कड़ी मेहनत करना चाहती हूं, चाहे मैं अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हासिल कर पाऊं या नहीं।’’

इससे पहले निधि ने 53.19 मीटर के थ्रो के साथ भारत के अभियान की शुरुआत की, लेकिन नाइजीरिया की ओबियागेरी पामेला अमाएची (53.68 मीटर) और युगांडा की मोनी नोरा अतीम (55.37 मीटर) ने तुरंत उन्हें पीछे छोड़ दिया। वहीं सीमा ने अपना चक्का नेट में डालकर फाउल के साथ शुरुआत की। इसके बाद टंक्स ने 58.21 मीटर के शुरुआती प्रयास के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया, लेकिन हॉल ने 59.27 मीटर के साथ बढ़त बना ली। निधि ने दूसरे प्रयाास में 55.67 मीटर का दमदार थ्रो करके तीसरा स्थान हासिल किया, लेकिन सीमा ने जल्द ही चक्का 57.32 मीटर तक फेंककर अपनी हमवतन को पीछे छोड़ दिया।

टंक्स ने 60.67 मीटर के प्रयास से रजत पदक पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली, जबकि सीमा आधे चरण में 58.65 मीटर की दूरी तय करके कांस्य पदक के लिए मजबूत दावेदार बन गईं। हॉल ने चौथे प्रयास में 60.95 मीटर के शानदार प्रदर्शन के साथ अपनी श्रेष्ठता साबित की और फिर पांचवें प्रयास में 61.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। राष्ट्रमंडल खेलों में चक्का फेंक में पदक हासिल करने के मामले में सीमा पूनिया भारत की सबसे सफल खिलाड़ी हैं। उनके खाते में तीन रजत (2006, 2014, 2018) और एक कांस्य (2010) पदक हैं। कृष्णा पूनिया (2010) और विकास गौड़ा (2014) ही ऐसे भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।