
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने 11-वर्षीय बेघर बच्चे से कुकृत्य करने के आरोपी की दोषसिद्धि में हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सड़कों पर गुजारा करने वाले बच्चे से तारीख, समय या कपड़ों का विवरण उतना सटीकता से देने की उम्मीद नहीं की जा सकती जितनी कि एक व्यवस्थित माहौल में रहने वाले गवाह से की जाती है। आरोपी की याचिका पर 10 अगस्त को पारित फैसले में न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 (कुकृत्य) और पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम की धारा-छह (गंभीर रूप से यौन हमला) के तहत उसे दोषी ठहराने संबंधी निचली अदालत के अगस्त 2025 का निर्णय बरकरार रखा।




