दिल्ली सरकार डीएसईयू के पुनर्गठन पर कर रही विचार

दिल्ली सरकार डीएसईयू के पुनर्गठन या विलय किए गए पॉलिटेक्निक संस्थानों को अलग करने पर विचार कर रही है, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के कामकाज पर सवाल उठे हैं।

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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय (डीएसईयू) के पुनर्गठन या इसमें विलय किए गए सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को अलग करने पर विचार कर रही है। एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के कामकाज से जुड़ी कुछ समस्याएं सामने आने के बाद इस कदम पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सरकार विश्वविद्यालय के कामकाज को लेकर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रही है। एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘समिति की रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। रिपोर्ट में यह पाया गया है कि विश्वविद्यालय के कामकाज में कुछ समस्याएं हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है-डीएसईयू के ढांचे में बदलाव करना या पॉलिटेक्निक संस्थानों को विश्वविद्यालय से अलग करना, ताकि तकनीकी शिक्षा को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘आगे बढ़ने के लिए दो विकल्प हैं—या तो विश्वविद्यालय के ढांचे में फिर से बदलाव किया जाए या कम से कम पॉलिटेक्निक संस्थानों को इससे अलग किया जाए, ताकि तकनीकी शिक्षा को सही तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। समिति की रिपोर्ट का मूल्यांकन किया जा रहा है और विशेषज्ञों से संपर्क किया जा रहा है।’’ इस साल की शुरुआत में अधिकारियों ने कहा था कि सरकार डीएसईयू के समग्र कामकाज की समीक्षा के लिए हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श के संबंध में विचार कर रही है। इसमें सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों और कौशल केंद्रों के विश्वविद्यालय में विलय के प्रभाव का आकलन भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया था कि विश्वविद्यालय की व्यापक समीक्षा के लिए पूर्व में गठित चार-सदस्यीय समिति की 30 जनवरी को बैठक हुई थी। बैठक में डीएसईयू के प्रशासनिक ढांचे, शैक्षणिक प्रक्रियाओं, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती, मानव संसाधन, पाठ्यक्रमों की रूपरेखा, विलय किए गए परिसरों में उपलब्ध संपत्तियों और सुविधाओं के उपयोग तथा अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की गई थी।

इस समीक्षा का महत्व इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि छात्र और कर्मचारी कथित कुप्रबंधन, बुनियादी ढांचे की कमियों, शुल्क में बढ़ोतरी, शिक्षकों से जुड़े मुद्दों और घटते नामांकन को लेकर लगातार शिकायतें करते रहे हैं। छात्र संगठनों और कर्मचारियों ने शैक्षणिक मानकों को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि क्या विश्वविद्यालय वंचित वर्गों के छात्रों को कौशल और तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के अपने मूल उद्देश्य को बनाए रखने में सफल रहा है। पुनर्गठन या पॉलिटेक्निक संस्थानों को अलग करने का प्रस्तावित कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ सप्ताह पहले ‘गजेटेड ऑफिसर्स फोरम फॉर टेक्निकल एजुकेशन, दिल्ली (जीओएफटीईडी)’ ने 10 सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के डीएसईयू में विलय की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की थी।

डीएसईयू की स्थापना दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के तहत की गई थी। विश्वविद्यालय ने अक्टूबर 2020 में अपना कामकाज शुरू किया था।
तकनीकी और कौशल शिक्षा के पुनर्गठन के तहत जनवरी 2021 में 23 विश्वस्तरीय कौशल केंद्रों का डीएसईयू में विलय किया गया था। इसके बाद उसी वर्ष अप्रैल में 10 सरकारी प्रौद्योगिकी संस्थानों, जिन्हें आमतौर पर पॉलिटेक्निक कहा जाता है, को भी विश्वविद्यालय में शामिल किया गया। मई 2021 में जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज और दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ टूल एंड इंजीनियरिंग के दो संस्थानों का भी इसमें विलय कर दिया गया था।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।