रांची : प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी पर तिखा हमला करते हुए कहा कि अगर छात्रों के मुद्दे पर पत्र लिखना ही उनकी नैतिक जिम्मेदारी है, तो वे अपनी नैतिकता का परिचय बिहार में भी दें।
बिहार में अपने अधिकार और मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल पर बाबूलाल मरांडी को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी पत्र लिखना चाहिए।
राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा नेताओं की राजनीति में सुविधा के हिसाब से नैतिकता बदल जाती है। झारखंड में छात्रों के प्रति चिंता और बिहार में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर चुप्पी—यह दोहरा चरित्र आखिर क्यों? यदि बाबूलाल मरांडी वास्तव में छात्रों के हितैषी हैं तो उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बिहार सरकार से भी जवाब मांगना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का अधिकार है। सरकार का दायित्व है कि वह छात्रों की बात सुने, संवाद करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले। लाठी और वाटर कैनन किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की पहली प्रतिक्रिया नहीं हो सकती।
मीडिया प्रभारी ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या छात्रों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन सही है? अगर गलत है तो वे बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसकी निंदा कब करेंगे? क्या भाजपा के लिए लोकतंत्र और छात्रों के अधिकारों का पैमाना राज्य बदलते ही बदल जाता है?
राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस छात्रों के अधिकार, लोकतांत्रिक आंदोलन और संवाद की राजनीति में विश्वास करती है। भाजपा नेताओं को भी राजनीतिक सुविधा के बजाय एक समान लोकतांत्रिक मानदंड अपनाना चाहिए।
बाबूलाल मरांडी अगर सचमुच छात्रों की चिंता करते हैं, तो केवल झारखंड में बयानबाजी नहीं, बल्कि बिहार के छात्रों के पक्ष में भी आवाज उठाएं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जवाब मांगें।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखकर MMDR बिल वापस लेने की मांग करें क्योंकि यह मामला दलगत राजनीति से ऊपर है राज्य हित में और बाबूलाल जी प्रतिपक्ष के नेता भी है जो अपनी जिम्मेदारी इस राज्य के प्रति भी वह प्रदर्शित करें


