

रांची: झारखंड में इस बार रक्षाबंधन के पावन पर्व पर महिलाओं द्वारा बनाई जा रही हस्तनिर्मित ‘आदिवा’ राखियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के ‘आदिवा’ ब्रांड के तहत राज्य भर की स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं इन खूबसूरत राखियों को तैयार कर रही हैं। ‘आदिवा’ एक ऐसा सरकारी मंच है जो ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए पारंपरिक जनजातीय आभूषणों, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराता है।





इस त्योहारी सीजन में ग्रामीण महिला कारीगरों के हुनर को बढ़ावा देने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से 24 से 27 अगस्त तक पूरे राज्य में एक विशेष बिक्री और प्रदर्शनी अभियान चलाया गया, जिसके तहत 56 स्टॉल लगाए गए हैं। ग्राहकों की सुगमता के लिए हर जिले के उपायुक्त (डीसी) कार्यालय परिसर स्थित ‘पलाश मार्ट’ में भी ये विशेष काउंटर खोले गए हैं। इस अभियान के तहत कुल 2.50 लाख राखियां बनाने और बेचने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 73 हजार से अधिक राखियां बिक चुकी हैं।
इन स्टॉलों पर लगभग 320 महिला कारीगरों की मेहनत और रचनात्मकता देखने को मिल रही है। महिलाओं ने पारंपरिक शिल्पकारी के साथ आधुनिक शैलियों का बेहतरीन तालमेल बिठाया है। बाजार में रेशम के धागों, ऑक्सीडाइज्ड मेटल, चांदी और रंग-बिरंगे मोतियों से बनी राखियां उपलब्ध हैं जो हर वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। एसएचजी सदस्यों का कहना है कि ‘आदिवा’ ब्रांड से जुड़ने के कारण उनके उत्पादों को न केवल नई पहचान मिली है, बल्कि उन्हें एक बड़ा ग्राहक वर्ग भी मिल रहा है, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। वहीं खरीदारी करने पहुंचे ग्राहकों का मानना है कि इन हस्तनिर्मित राखियों को खरीदने से न केवल प्राकृतिक व रसायन-मुक्त धागों का उपयोग सुनिश्चित होता है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय महिला कारीगरों को भी सीधा समर्थन मिला है।
