

नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने 2021 के दहेज हत्या के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए कहा कि दहेज की मांग तथा पत्नी द्वारा आत्महत्या किए जाने से ठीक पहले उसके साथ की गई क्रूरता के बीच प्रत्यक्ष और सीधा संबंध स्थापित होता है। अपर सत्र न्यायाधीश सैयद जीशान अली वारसी ने सुरेंद्र यादव को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304बी (दहेज हत्या) और 498ए (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) के तहत दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी जुआ खेलने और शराब पीने का आदी था तथा अक्सर अपनी पत्नी पूजा के साथ मारपीट करता था। वर्ष 2017 में शादी के बाद से ही यादव जुए का कर्ज चुकाने समेत कई बहानों से पूजा से धन की मांग करता आ रहा था।





पूजा का शव पांच जनवरी 2021 को पालम कॉलोनी स्थित उसके ससुराल में फंदे से लटका मिला था। अदालत ने 25 अगस्त को सुनाए गए 75 पन्नों के फैसले में कहा, ‘‘गवाहों की गवाही पर विचार करने के बाद यह साबित होता है कि उसकी मृत्यु से ठीक पहले धन या दहेज की मांग की गई थी और जैसा कि पूजा ने फोन पर अपने पिता को बताया था कि दहेज की मांग पूरी कराने के लिए उसको तीन दिन तक प्रताड़ित किया गया था।’’ अदालत ने कहा, ‘‘इस प्रकार, दहेज की मांग और पूजा की मृत्यु से ठीक पहले उसके साथ की गई क्रूरता के बीच एक जीवंत और सीधा संबंध स्थापित होता है तथा यह संबंध विश्वसनीय, सुसंगत और भरोसेमंद है।’’ अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने उचित संदेह से परे यह साबित कर दिया है कि मौत से ठीक पहले पूजा को दहेज की मांग को लेकर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
न्यायाधीश ने कहा कि पूजा ने अपनी मृत्यु से महज दो दिन पहले पिता को फोन किया था और रोते हुए बताया था कि रुपयों की मांग को लेकर लगातार तीन दिन तक उसके साथ मारपीट की गई। अदालत ने पति के इस बचाव को खारिज कर दिया कि कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक कठिनाइयों के कारण तनाव की वजह से पूजा ने आत्महत्या की थी। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र पड़ोसियों का गवाह के रूप में सामने न आना मामले को कमजोर नहीं करता, क्योंकि दहेज के लिए उत्पीड़न आमतौर पर ‘‘वैवाहिक घर की चारदीवारी’’ के भीतर होता है, जहां बाहरी लोगों की मौजूदगी बहुत कम होती है। अदालत ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष ने अपना मामला संदेह से परे साबित कर दिया है।” अदालत ने सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए मामले को सात सितंबर को सूचीबद्ध किया है। धारा 304बी के तहत दहेज हत्या के मामले में कम से कम सात वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
