

रांची : झारखंड में समावेशी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और बौद्धिक तथा विकासात्मक दिव्यांगता से जूझ रहे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने एक पहल की है। राज्य में ‘दिशा’ पाठ्यक्रम के तहत लगभग 400 रिसोर्स शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए हाल ही में चार दिवसीय विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों को दिव्यांग बच्चों की सीखने की क्षमता और उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराया गया।





यह संपूर्ण प्रशिक्षण अभियान चार अलग-अलग चरणों में आवासीय कार्यक्रम के रूप में चलाया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक चरण तीन दिनों का होगा।इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्पेशली एबल्ड चाइल्ड को उनकी क्षमताओं के अनुरूप संरचित और सुलभ शिक्षण अवसर प्रदान करना है, जिससे वे मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकें। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन के अनुसार, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से शिक्षकों को व्यावहारिक कौशल हासिल होंगे, जिससे वे कक्षा में दिव्यांग बच्चों को अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ा सकेंगे। इस अभियान को राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी), सीआरसी, जेईपीसी और यूनिसेफ झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में लागू किया जा रहा है। देश के 10 अन्य राज्यों में पहले ही सफल रहे ‘दिशा’ मॉडल के तहत, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी रिसोर्स शिक्षकों को उनकी स्कूलों में नामांकित दिव्यांग बच्चों की संख्या के आधार पर विशेष शिक्षण सामग्री और वर्कशीट भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
