कार्यकर्ता की रासुका हिरासत रद्द करने संबंधी आदेश को चुनौती देंगे: सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय से कहा

आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को केंद्र चुनौती देगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की बात कही।

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नई दिल्ली: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत को रद्द करने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी। शीर्ष विधि अधिकारी ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष यह बयान दिया।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण ग्रेटर नोएडा के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी किए गए नोटिस के संबंध में एक वरिष्ठ अधिवक्ता की पिछली बात का ज़िक्र किया और स्पष्ट किया कि संबंधित नोटिस जिलाधिकारी ने नहीं, बल्कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जारी किया था। मेहता ने कहा, ‘‘मैं इस मामले को नहीं देख रहा हूँ… (लेकिन) नोएडा जिलाधिकारी के पास मीडिया वगैरह से बहुत सारे सवाल आ रहे हैं कि आपने क्या आदेश जारी किया है, वगैरह।’’

जब पीठ ने याद दिलाया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक छात्रा को हिरासत में लेने के गौतम बुद्ध नगर प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया था और उसे मुआवज़ा देने का आदेश दिया था, तो सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, ‘‘हम उसे चुनौती दे रहे हैं।’’ इससे पहले आज, प्रधान न्यायाधीश ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट-ग्रेटर नोएडा की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने कॉजपा के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी किया था। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा कि न्यायालय के पहले के आदेश के बावजूद मजिस्ट्रेट की नोटिस जारी करने की ‘‘हिम्मत’’ कैसे हुई।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले में कार्यकारी मजिस्ट्रेट-ग्रेटर नोएडा से स्पष्टीकरण मांगेगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को नोएडा में अप्रैल में हुए मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में रासुका के तहत चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने हिरासत आदेश जारी करने के जिलाधिकारी (नोएडा) के तरीके की कड़ी आलोचना की थी और चेतावनी दी थी कि ‘‘मनमानी करने वाली’’ नौकरशाही का लगातार ‘‘तानाशाही’’ वाला व्यवहार उत्तर प्रदेश को दमनकारी समाज में बदल सकता है। इसने साथ ही, चौधरी को पांच लाख रुपये का मुआवज़ा प्रदान किए जाने का आदेश भी दिया और यह भी कहा कि यह रकम गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम (जिन्होंने हिरासत का आदेश दिया था) और थाना प्रभारी स्तर तक के ज़िम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।