नयी दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश इस समूह को ‘‘पश्चिम विरोधी’’ मंच के रूप में देखने में काफी सहज हैं, लेकिन ऐसा दृष्टिकोण भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं है।
थरूर ने यह भी कहा कि ब्रिक्स ऐसा मंच होना चाहिए जो ‘‘पश्चिम से अलग हो, लेकिन पश्चिम विरोधी नहीं’’ हो।
पूर्व विदेश राज्य मंत्री ने एक बातचीत में कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना भारत के लिए ‘‘बहुत प्रतिष्ठा’’ की बात है, क्योंकि इसमें ब्रिक्स देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देशों के भी करीब एक दर्जन राष्ट्राध्यक्ष एवं शासनाध्यक्ष राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर पर शामिल होंगे।
थरूर का कहना है कि इस समूह के अध्यक्ष के तौर पर भारत की यह खास जिम्मेदारी है कि वह ’ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को सामने रखे, लेकिन साथ ही भारत के प्रत्यक्ष राष्ट्रीय हितों को भी बहुत सावधानी से ध्यान में रखे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि ब्रिक्स ऐसा मंच हो जो पश्चिम से इतर हो, लेकिन पश्चिम विरोधी नहीं। यह एजेंडा हर दूसरे देश के एजेंडे जैसा नहीं है। ब्रिक्स में कुछ अन्य देश इसे भू-राजनीतिक रूप से गैर-पश्चिमी और साथ ही पश्चिम विरोधी मंच के रूप में देखने में काफी सहज हैं।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगा कि यह भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं होगा।’’
थरूर ने कहा कि कई विश्व नेताओं की भारत यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत भी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) उन सभी राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों से मिलने के लिए बाध्य हैं, जो उनसे मुलाकात का अनुरोध करेंगे। इसका मतलब इन देशों के नेताओं के साथ करीब एक दर्जन महत्वपूर्ण बैठकें हो सकती हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए निश्चित रूप से राष्ट्रपति शी (चिनफिंग) और राष्ट्रपति पुतिन के साथ होने वाली बैठकें दुनिया भर की सुर्खियां बटोरेंगी।’’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि इसके अलावा भी कई अन्य महत्वपूर्ण बैठकें होंगी।
भारत-चीन संबंधों पर थरूर ने कहा कि दोनों देशों के बीच मुश्किलें पूरी तरह एक तरफ से पैदा हुई हैं और 2020 में गलवान की घटना के बाद से दोनों देशों के संबंध पूरी तरह खराब हो गए हैं।
उनका कहना है, ‘‘इसके अलावा, चीन ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिन्हें केवल शत्रुतापूर्ण माना जा सकता है। वह हमारे दोनों देशों के बीच अनिर्धारित सीमा के विभिन्न हिस्सों में जमीनी स्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है।’’
थरूर ने कहा कि सबसे खराब बात यह है कि चीन ने व्यापार को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया है और भारतीय आयातकों की कई आवश्यक चीनी वस्तुओं पर निर्भरता का फायदा उठाते हुए अपनी मर्जी के मुताबिक इनकी आपूर्ति रोक दी।
उन्होंने कहा, ‘‘एक स्वाभिमानी भारत इन चीजों के आगे लगातार नहीं झुकेगा। यह समझना महत्वपूर्ण है कि हम भी किसी न किसी तरह अपने हितों के लिए खड़े होंगे।’’
थरूर ने कहा, ‘‘इसलिए द्विपक्षीय संबंध और द्विपक्षीय बैठक संभावित रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हम चीनी पक्ष की ओर से कुछ अधिक लचीलापन, समझ और मित्रता की उम्मीद कर रहे हैं, जो पिछले छह वर्षों में हमें देखने को नहीं मिली है।’’
थरूर ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के माध्यम से भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिक्स के 11 देश दुनिया की आबादी के बहुमत और वैश्विक जीडीपी के 41 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है, बाकी दुनिया को इसे बहुत गंभीरता से लेना होगा।’’
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘दूसरी बात यह है कि ब्रिक्स के सदस्य देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देशों के करीब एक दर्जन राष्ट्राध्यक्ष एवं शासनाध्यक्षों का राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर पर यहां आना हमारे लिए बहुत प्रतिष्ठा की बात है।’’
थरूर ने कहा कि यह वैश्विक मंच पर भारत की एक तरह की कूटनीतिक आयोजन क्षमता को दर्शाता है, जिसका अपने आप में महत्व है।
ब्रिक्स के समक्ष मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण तलाशना मुश्किल है। उदाहरण के लिए, वैश्विक मुद्दों पर किसी सहमत घोषणा तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है।

