लेह: लद्दाख राज्य वन्यजीव बोर्ड ने विसंगतियों का हवाला देते हुए संरक्षित क्षेत्रों की सीमाओं के निर्धारण से संबंधित उप-समिति की रिपोर्ट खारिज कर दी है। वहीं, उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने अधिकारियों को इन क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के अधिकारों और दावों का निपटारा दो महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
बोर्ड की 16वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए सक्सेना ने हेमिस राष्ट्रीय उद्यान, चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य और काराकोरम (नुब्रा-श्योक) वन्यजीव अभयारण्य में स्थानीय समुदायों के अधिकार तय करने को प्राथमिकता देने को कहा।
लोक भवन के अनुसार, उप-समिति का गठन जनवरी में मुख्य सचिव की निगरानी में किया गया था। इसका उद्देश्य वन्यजीव क्षेत्रों की पहचान करना और सैन्य बस्ती तथा आवश्यक आबादी वाले क्षेत्रों को बाहर रखना था।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से बस्तियां और मानवीय आवास मौजूद हैं, जो साफ तौर पर वन्यजीव क्षेत्र से बाहर है लेकिन उप-समिति ने इस क्षेत्र को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया था।
प्रवक्ता ने बताया कि बोर्ड ने पाया कि 1987 की प्रारंभिक अधिसूचना में संरक्षित क्षेत्रों की सीमाएं जमीन पर सही तरीके से नहीं दर्शाई गई थीं।
बयान के अनुसार, सक्सेना ने कहा कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत स्थानीय लोगों के अधिकारों के निपटारे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाए बिना सीमांकन किया गया।
बयान के अनुसार, उपराज्यपाल ने गड़बड़ियों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए उप-समिति की रिपोर्ट को रद्द करने का निर्देश दिया।
बोर्ड ने सार्वजनिक सुनवाई दोबारा शुरू कर दो महीने में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
बोर्ड ने सीमा क्षेत्रों में रक्षा एवं बिजली ढांचे समेत 23 परियोजनाओं को भी मंजूरी के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को भेजा।

