मामला राजधानी रांची के मोरहाबादी इलाके में स्थित रिम्स की सरकारी जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज और कथित जाली वंशावली के आधार पर सरकारी जमीन को निजी लोगों के नाम कराने की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
करीब 60 डिसमिल जमीन से जुड़ा मामला
मामले में करीब 60 डिसमिल जमीन का उल्लेख है। सोनू कुमार शरण पर आरोप है कि उन्होंने इसमें से 18 डिसमिल जमीन अपनी पत्नी के नाम ट्रांसफर कराई। आरोप के मुताबिक, 24 जुलाई 2019 को जमीन का मूल्य करीब 47.52 लाख रुपये दर्शाते हुए ट्रांसफर किया गया था।
जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार, वर्ष 2016 में कथित फर्जी वंशावली के आधार पर सोनू कुमार शरण को जमीन से संबंधित GPA होल्डर बनाए जाने की बात सामने आई थी।
एसीबी कोर्ट से खारिज हो चुकी थी याचिका
इस मामले में सोनू कुमार शरण ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एसीबी कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, विशेष अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया।
अब हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। मामले में सरकारी जमीन के कथित फर्जी हस्तांतरण और दस्तावेजों से जुड़े आरोपों की जांच पहले से चल रही है।

