नई दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने बुधवार को कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में चार सीट में से तीन पर अभाविप की जीत राष्ट्रवाद में युवा पीढ़ी के विश्वास और छात्र संगठन के काम पर उसके भरोसे को दर्शाती है। ‘पीटीआई’ के साथ विशेष वीडियो साक्षात्कार में सोलंकी ने कहा कि ‘जेन जी’ और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र अभाविप की विचारधारा को समझते हैं और राष्ट्रवाद, सामाजिक सद्भाव तथा सभी के कल्याण के लिए काम करने पर संगठन के विचार का समर्थन करते हैं।

उन्होंने कहा, “दूसरी वजह यह है कि छात्र, खासकर ‘जेन जी’ के युवा, राष्ट्रवाद की अवधारणा में यकीन रखते हैं। वे जानते हैं कि अभाविप किस तरह का संगठन है। यह एक ऐसा संगठन है, जो विश्वविद्यालय परिसर में खड़ा होकर ‘भारत माता की जय’ और राष्ट्रवाद के नारे लगाता है।” सोलंकी ने अभाविप के दृष्टिकोण के बारे में कहा, “न तो जातिवाद, न ही क्षेत्रवाद; सबसे ऊपर राष्ट्रवाद।” उन्होंने कहा कि छात्र समझते हैं कि अभाविप “जातिवाद को बढ़ावा नहीं देता” और संगठन का मानना है कि सभी को सामाजिक सद्भाव की भावना के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।
सोलंकी ने कहा, ‘‘अभाविप एक छात्र संगठन है, जो सबको साथ लेकर चलने और व्यापक दृष्टिकोण के साथ सभी के कल्याण के लिए काम करने में यकीन रखता है। इस विचारधारा के कारण भी ‘जेन जी’, युवा पीढ़ी और विश्वविद्यालय के छात्र हमारे साथ हैं।” अभाविप महासचिव ने डूसू चुनाव में जीत का श्रेय संगठन की ओर से जमीनी स्तर पर लगातार किए गए काम को दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करना भी जीत की एक अहम वजह रहा। सोलंकी ने कहा, “मुझे अभाविप की जीत के दो कारण नजर आते हैं। पहला-हमारे कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत, जो जमीनी स्तर पर लगातार डटे रहे और हमारे उम्मीदवार, जो पिछले कई वर्षों से छात्रों के मुद्दे उठाते रहे हैं और उन पर काम करते रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “दूसरा कारण यह है कि जब भी छात्रों को कोई समस्या होती है, हमारा कैडर लगभग हमेशा उनके लिए काम करने को तैयार रहता है। छात्र देख सकते हैं कि अभाविप एक ऐसा संगठन है, जो हमेशा उनके लिए काम करता है।” सोलंकी ने कहा कि अपने घोषणापत्र में किए गए वादों के क्रियान्वयन के सिलसिले में रिपोर्ट कार्ड जारी करने की अभाविप की प्रथा से छात्रों के बीच भरोसा बनाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, “हमने अपने घोषणापत्र में जो भी बातें शामिल की थीं और पिछले साल के घोषणापत्र में जो भी कहा था, उन्हें हमने पूरा किया। हमने एक रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया। इससे छात्रों के बीच यह भरोसा पैदा हुआ कि ‘उन्होंने (अभाविप) जो कहा, वह करके दिखाया।’ इस साल भी हमने जो कुछ भी कहा है, अगले साल हम उसका रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे।”
छात्रों के रहने की व्यवस्था, परिसर के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर सोलंकी ने कहा कि अभाविप अपने चुनाव घोषणापत्रों में लगातार इन मुद्दों को उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन ने छात्राओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और ‘पिंक बूथ’ जैसे उपाय करने की मांग की और दावा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 1,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) में बहुमत हासिल करने में अभाविप के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर सोलंकी ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का मुकाबला “अलग तरह का” है, क्योंकि वहां अभाविप की विचारधारा का विरोध करने वाले छात्र और समूह मौजूद हैं। हालांकि, सोलंकी ने कहा कि संगठन ने पिछले दशक में जेएनयू में काफी बढ़त हासिल की है।
उन्होंने कहा, “आप देखेंगे कि एक समय, यानी 2015 के आसपास, (जेएनयूएसयू चुनाव में) अभाविप के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को 200-300 वोट मिलते थे। लेकिन जेएनयूएसयू के पिछले चुनाव में हमारे उम्मीदवार को लगभग 2,000 वोट हासिल हुए। तो, कुछ मायनों में पिछले 10 वर्षों में हमने काफी बढ़त हासिल की है।” सोलंकी ने इस विमर्श को खारिज कर दिया कि ‘नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया’ (एनएसयूआई) के कैडर में बगावत डूसू चुनाव में अभाविप की जीत का कारण बनी। उन्होंने कहा कि यह जीत मुख्य रूप से संगठन के काम और छात्रों के बीच बनाए गए भरोसे की वजह से मिली। कई विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों पर रोक या उनका आयोजन न किए जाने से जुड़े सवाल पर सोलंकी ने कहा कि अभाविप सभी राज्यों में इन्हें फिर से शुरू करने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा, “चाहे राजस्थान हो या मध्यप्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना या कर्नाटक, हम हर जगह मांग कर रहे हैं कि छात्र संघ चुनाव होने चाहिए।”


