अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी ने विधायक से लगाई गुहार-घर में शौचालय नहीं है बनवा दीजिए

देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली हॉकी खिलाड़ी विनीमा धान के घर में शौचालय नहीं है। उन्होंने विधायक से मदद मांगी, जिसके बाद जल्द निर्माण का आश्वासन मिला।

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रांची: देश और राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाली हॉकी खिलाड़ी के घर की जमीनी हकीकत ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया के आवासीय कार्यालय में आयोजित खिलाड़ियों के सम्मान समारोह के दौरान जूनियर एशिया कप में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य विनीमा धान ने विधायक से अपने घर में शौचालय बनवाने की भावुक अपील की। विनीमा ने विधायक से कहा, सर, मेरे घर में शौचालय नहीं है, प्लीज! बनवा दीजिए।

विनीमा धान जो कि तोरपा प्रखंड के जरियागढ़ स्थित बांभन टोली की रहने वाली हैं, उन्होंने बताया कि देश का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद आज भी उनके घर में मूलभूत सुविधा यानी शौचालय उपलब्ध नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने तत्काल संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए और आश्वासन दिया कि जल्द ही विनीमा के घर में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

इसी समारोह में मौजूद अन्य अंतरराष्ट्रीय साथी खिलाड़ियों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं रखीं। जूनियर एशिया कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की सदस्य रोशनी आईंद के माता-पिता ने भी विधायक के सामने अपने आवास की समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि वे तोरपा प्रखंड के उड़िकेल गांव में रहते हैं और उनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। वहीं, अंडर-18 सब-जूनियर एशिया कप में भारतीय टीम को कांस्य पदक दिलाने वाली नीलम तोपनो के परिजनों ने अपने आवास के साथ-साथ गांव में सड़क की समस्या से विधायक को अवगत कराया।

ओडीएफ के दावों पर उठे सवाल

यह घटना राज्य में खुले में शौच से मुक्ति के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में ही कर्रा प्रखंड के जरियागढ़ सहित पूरे झारखंड को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के घर में शौचालय न होना कागजी दावों और जमीनी हकीकत के अंतर को साफ उजागर करता है।इस मामले पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता नसीम कुमार ने कहा कि 2018 में ही पूरे प्रखंड और पंचायत को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। इसके बाद भी अगर किसी के पास शौचालय नहीं बन पाया है, तो वे अपने स्तर से इसका निर्माण करवा सकते हैं, जिसके बाद विभाग नियमानुसार उनके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कर देगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।