सशक्त शिक्षक ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की है आधारशिला: संजय सर्राफ

विश्व शिक्षक दिवस पर संजय सर्राफ ने शिक्षकों के सम्मान, अधिकार, बेहतर कार्य परिस्थितियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए समाज से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

Neeral Prakash
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रांची : हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व शिक्षक दिवस प्रत्येक वर्ष 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस शिक्षकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है।

शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों के विकास और उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाले मार्गदर्शक होते हैं। किसी भी राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक समृद्धि में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विश्व शिक्षक दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों के योगदान को सम्मान देना, उनकी समस्याओं के प्रति समाज और सरकार का ध्यान आकर्षित करना तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए जागरूकता बढ़ाना है।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने वर्ष 1994 में 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। यह दिवस वर्ष 1966 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और यूनेस्को द्वारा शिक्षकों की स्थिति से संबंधित अपनाई गई सिफारिश की स्मृति में मनाया जाता है। इस सिफारिश में शिक्षकों के अधिकारों, जिम्मेदारियों, नियुक्ति, कार्य परिस्थितियों और व्यावसायिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर दिशा-निर्देश दिए गए थे।

शिक्षक समाज के ऐसे शिल्पकार हैं, जो विद्यार्थियों को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, ईमानदारी, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करते हैं। माता-पिता के बाद शिक्षक ही ऐसे मार्गदर्शक होते हैं,जिनकी सीख जीवनभर व्यक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। एक योग्य शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित करता है।

वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के बीच शिक्षकों की जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई हैं। ऐसे समय में शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण,सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां, पर्याप्त संसाधन और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करना आवश्यक है।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार, संवेदनशील और विवेकशील नागरिक बनाना भी है। विश्व शिक्षक दिवस हमें यह संदेश देता है कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके ज्ञान, समर्पण और परिश्रम को उचित मान्यता देना पूरे समाज का दायित्व है। आइए, इस अवसर पर हम शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प लें, क्योंकि सशक्त शिक्षक ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला हैं।

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नीरल प्रकाश के पास पत्रकारिता में 2 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में काम किया है। पिछले 2 सालों से वे IDTV इंद्रधनुष के साथ काम कर रही हैं, जहां उन्होंने ऑन-एयर प्रस्तुतिकरण के साथ-साथ बैकएंड कंटेंट क्रिएशन में भी योगदान दिया। समाचार रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने आकर्षक स्क्रिप्ट तैयार करने और कहानी को पेश करने का अनुभव भी प्राप्त किया है।