कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को विपक्षी दलों पर भड़काऊ बयानों और अशांति पैदा करने की कोशिशों के जरिए उपचुनाव के दौरान माहौल खराब करने का आरोप लगाया और निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का आग्रह किया। प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता तनाव पैदा करने के लिए झूठे, भड़काऊ और विभाजनकारी बयान दे रहे हैं तथा हार की आशंका को देखते हुए चुनाव परिणामों को चुनौती देने की जमीन तैयार कर रहे हैं। सरकार ने ’70:30 अनुपात’ संबंधी टिप्पणियों, बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौत की कामना वाले बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि भड़काऊ राजनीतिक बयानबाजी के एक सिलसिले को दर्शाती हैं।

बाबरी मस्जिद का संदर्भ एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर के उस विवादास्पद प्रस्ताव से है जिसमें उन्होंने अयोध्या में गिरायी गई बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक ढांचा बनाने की बात कही थी। यह मुद्दा पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। कांग्रेस की पुनर्मतदान की मांग और उसके धरने की आलोचना करते हुए सरकार ने कहा कि पार्टी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय अपनी चिंताएं पहले भी उठा सकती थी, परिणाम घोषित होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने विपक्षी दलों पर पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चली आ रही चुनावी हिंसा की संस्कृति को फिर से बढ़ावा देने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव के पक्ष में है। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मंगलवार को मतदान जारी है और अपराह्न एक बजे तक 58 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर लिया था। नंदीग्राम में सड़क बाधित किए जाने, प्रदर्शन और अल्पसंख्यक महिलाओं को मतदान से रोकने के आरोपों पर सरकार ने कहा कि शिकायतों की जांच करना और उचित कार्रवाई करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं, उन्हें ठोस सबूत के साथ निर्वाचन आयोग के पास जाना चाहिए।’’ उन्होंने निर्वाचन आयोग से इन दावों की जांच करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि मतदाता बिना किसी डर या धमकी के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें। नंदीग्राम से कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान से जुड़ी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें आरोप है कि एक इलाके के दौरे के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया था, सरकार ने इसे जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति बताया।
सरकार ने भाजपा की संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए दावा किया कि परिणाम घोषित होने के बाद विपक्षी उम्मीदवार अपनी जमानत राशि गंवा देंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अब हिंसा, धमकी और विभाजन की राजनीति नहीं चाहती तथा सत्तारूढ़ भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने की किसी भी कोशिश का राजनीतिक और संवैधानिक माध्यमों से विरोध करेगी।


