सीजीएल परीक्षा रद्द करने के मामले में हाई कोर्ट में बहस पूरी, सरकार ने माना-परीक्षा में गड़बड़ी गंभीर विफलता

झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों पर सरकार ने अपना पक्ष रखा।

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रांची: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है। सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया और अदालत में स्वीकार किया कि प्रश्नपत्र लीक अभ्यर्थियों तक प्रश्न-उत्तर पहुंचने और जांच में सामने आई गड़बड़ियों के कारण पूरी परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई थी। सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखते हुए कहा कि यह गड़बड़ी केवल किसी एक स्तर पर नहीं हुई, बल्कि पूरी व्यवस्था में गंभीर स्तर पर सिस्टम की विफलता थी। जिस एजेंसी को परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी के स्तर से प्रश्नपत्र लीक कराए जाने और नेपाल समेत अन्य स्थानों पर अभ्यर्थियों को उत्तर याद कराने की बात सामने आई है।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि जांच में परीक्षा में अनियमितता से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, जिससे यह तय करना कठिन हो गया था कि किन अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से लाभ मिला और कौन निष्पक्ष तरीके से शामिल हुए। ऐसी स्थिति में केवल कुछ अभ्यर्थियों का परिणाम रद्द करने के बजाय पूरी परीक्षा को रद्द करना ही उचित निर्णय था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया जिसमें गड़बड़ी के आधार पर पूरी नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।

दूसरी ओर, हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने सवाल उठाया कि जिस एजेंसी को पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, उसे ही परीक्षा कराने की जिम्मेदारी क्यों दी गई। उन्होंने कहा कि कथित किंगपिन अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद कई नए तथ्य सामने आए हैं और इस गड़बड़ी से उन योग्य अभ्यर्थियों का नुकसान हुआ है जो चयन के हकदार थे। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की नींव जनता और अभ्यर्थियों के भरोसे पर टिकी होती है, और यदि निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो जाएं तो नियुक्तियों पर भरोसा बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

वहीं दूसरी ओर, शुक्रवार को हाई कोर्ट में जेपीएससी की ओर से आयोजित विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इनमें सीडीपीओ परीक्षा, 11वीं से 13वीं झारखंड सिविल सेवा परीक्षा, और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा सहित अन्य परीक्षाएं शामिल हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।