झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारी को 2012 से मिलेगा प्रमोशन का वित्तीय लाभ

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: विभागीय गलती से देर से हुए प्रमोशन पर कर्मचारी को मिलेगा 2012 से वित्तीय लाभ, कोर्ट ने दिए संशोधित अधिसूचना के निर्देश।

Razi Ahmad
5 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने प्रमोशन में देरी से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी का प्रमोशन विभागीय अधिकारियों की गलती के कारण देर से होता है, तो उसे वित्तीय लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मनोज कुमार सिंह को एक अक्टूबर 2012 से सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद का वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने अनुभाग पदाधिकारी के पद पर उनके प्रमोशन की तिथि 24 सितंबर 2025 से बदलकर 4 दिसंबर 2020 करने के लिए आवश्यक संशोधन अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।

वरीयता सूची में नाम छूटने से अटका था प्रमोशन

मनोज कुमार सिंह की नियुक्ति वर्ष 1997 में तृतीय श्रेणी के लिपिकीय संवर्ग में हुई थी। वर्ष 2003 में उन्होंने देवघर हिंदी विद्यापीठ से साहित्य अलंकार की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2012 में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद पर प्रमोशन के लिए पात्र होने के बावजूद उनका नाम वरीयता सूची में शामिल नहीं होने के कारण उन्हें प्रमोशन नहीं मिल सका। वहीं, एक अक्टूबर 2012 को उनके कनिष्ठ कर्मचारियों को इस पद पर प्रमोशन दे दिया गया था।

बाद में उनकी शैक्षणिक योग्यता की वैधता को लेकर भी विवाद हुआ। राज्य सरकार ने 26 फरवरी 2015 को साहित्य अलंकार की डिग्री को अमान्य करने संबंधी पत्र जारी किया था। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

डिग्री को लेकर सरकार के फैसले में हुआ बदलाव

हाईकोर्ट ने 10 मई 2022 को संबंधित मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि डिग्री को अमान्य करने का निर्णय पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने 15 जून 2023 को पत्र जारी कर 26 फरवरी 2015 से पहले प्राप्त ऐसी डिग्रियों को मान्य किया।

इसके बाद 20 सितंबर 2024 के विभागीय आदेश से मनोज कुमार सिंह को एक अक्टूबर 2012 से सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद पर काल्पनिक प्रमोशन दिया गया। हालांकि, उन्हें इस अवधि का वास्तविक वित्तीय लाभ नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कर्मचारी की गलती नहीं होने पर लाभ रोकना उचित नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रमोशन में देरी के लिए मनोज कुमार सिंह स्वयं जिम्मेदार नहीं थे। पहले वरीयता सूची में उनका नाम छूटने और बाद में शैक्षणिक योग्यता को लेकर सरकारी निर्णय के कारण उनका प्रमोशन प्रभावित हुआ था।अदालत ने समान परिस्थितियों वाले एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जब प्रमोशन में देरी विभागीय चूक के कारण हुई हो, तो विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने के आधार पर कर्मचारी को वित्तीय लाभ से वंचित करना उचित नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड वित्त नियमावली के नियम 74 और झारखंड सेवा संहिता के नियम 58 के आधार पर भी ऐसी परिस्थिति में कर्मचारी को वित्तीय लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकार को संशोधित अधिसूचना जारी करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मनोज कुमार सिंह को एक अक्टूबर 2012 से सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद का वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया है। इसके लिए 20 सितंबर 2024 और 24 सितंबर 2025 के संबंधित आदेशों में आवश्यक संशोधन करना होगा।

इसके अलावा, अनुभाग पदाधिकारी के पद पर प्रमोशन की तिथि 24 सितंबर 2025 के स्थान पर 4 दिसंबर 2020 करने के लिए शुद्धिपत्र जारी करने का आदेश दिया गया है। यह वही तारीख है, जिस दिन उनके कनिष्ठ कर्मचारी को इस पद पर प्रमोशन मिला था।

अदालत ने सभी लागू परिणामी लाभ देने का निर्देश देते हुए मनोज कुमार सिंह की रिट याचिका स्वीकार कर ली।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।