
17,786 शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है मामला
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 28 दिसंबर 2016 को विज्ञापन संख्या 21/2016 जारी कर 17,786 स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों के पद भी शामिल थे।
शैक्षणिक योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के बाद राज्य सरकार ने जनवरी 2017 में स्पष्टीकरण जारी किया और आयोग ने संशोधित विज्ञापन के जरिए संबंधित विषयों की पात्रता निर्धारित की।
परीक्षा पास करने के बाद भी क्यों रद्द हुई उम्मीदवारी?
अभ्यर्थियों ने संशोधित विज्ञापन के आधार पर आवेदन किया, परीक्षा पास की और दस्तावेज सत्यापन में भी शामिल हुए। इसके बावजूद 21 जून 2023 के नोटिस के जरिए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।
कारण बताया गया कि आवेदन की अंतिम तिथि तक उनके पास संबंधित विषय में पीजी या आचार्य की डिग्री नहीं थी। इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस फैसले को चुनौती दी।
सरकार की दलील पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
राज्य सरकार और JSSC ने अदालत में दलील दी कि मूल नियमावली में पीजी या आचार्य की डिग्री का प्रावधान था। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से नियम 16 के तहत जारी स्पष्टीकरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत के अनुसार, जब अभ्यर्थियों ने सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता और संशोधित विज्ञापन के आधार पर चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया, तो बाद में अलग शर्त लागू कर उनकी उम्मीदवारी खारिज करना उचित नहीं था।
चार सप्ताह में नियुक्ति, अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट ने उम्मीदवारी रद्द करने वाले संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और JSSC को याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी स्वीकार कर उन्हें स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्त करने और नियमानुसार परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया है।


