ब्रजमोहन राम ओडिशा के 28वें राज्यपाल बने हैं। उन्होंने हरि बाबू कंभमपति का स्थान लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को उन्हें ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया था। तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके राम की नियुक्ति को उनके लंबे राजनीतिक और संसदीय अनुभव से जोड़कर देखा जा रहा है।

चंदवा में जन्म, लोहरदगा से पूरी की पढ़ाई
ब्रजमोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार और वर्तमान झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा में हुआ था। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े राम का परिवार मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर रहा है।
उन्होंने बीएस कॉलेज, लोहरदगा से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पांच मार्च 1979 को उनका विवाह लीला देवी से हुआ। उनके तीन बेटे हैं। चंदवा से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर बिहार की राजनीति और फिर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा।
लातेहार विधानसभा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
ब्रजमोहन राम ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बिहार विधानसभा से की। वर्ष 1991 से 1995 तक वह लातेहार विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे। उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और यह इलाका बिहार का हिस्सा था।
विधानसभा में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनावों में हिस्सा लिया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक भूमिका का विस्तार किया।
लगातार तीन बार पहुंचे लोकसभा
वर्ष 1996 में ब्रजमोहन राम 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद 1998 में 12वीं और 1999 में 13वीं लोकसभा के सदस्य बने। लगातार तीन कार्यकाल तक सांसद रहने के कारण उन्हें संसदीय प्रक्रियाओं और विभिन्न नीतिगत विषयों पर काम करने का अनुभव मिला।
सांसद के रूप में उनका कार्य केवल लोकसभा की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कई संसदीय समितियों में भी सदस्य के तौर पर जिम्मेदारियां निभाईं।
संसदीय समितियों में भी निभाई अहम भूमिका
अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान ब्रजमोहन राम ने कई महत्वपूर्ण समितियों में भागीदारी की। वर्ष 1996-97 में वह गृह मामलों की समिति और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति से जुड़े रहे। इसी अवधि में उन्होंने इस्पात एवं खान मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति और पूर्वी रेलवे से संबंधित अनौपचारिक समिति में भी काम किया।
वर्ष 1998-99 के दौरान वह ऊर्जा समिति, विद्युत उपसमिति-I और कोयला मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति से जुड़े रहे। वर्ष 2000 से 2004 के बीच उन्होंने परिवहन एवं पर्यटन समिति में सदस्य के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, रेल मंत्रालय की सलाहकार समिति में भी उनकी भागीदारी रही।
झारखंड के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
ब्रजमोहन राम का ओडिशा के राज्यपाल पद तक पहुंचना झारखंड, खासकर पलामू और लातेहार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। एक क्षेत्रीय विधायक से तीन बार लोकसभा सांसद बनने और अब राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने तक का उनका सफर उनके राजनीतिक जीवन का नया अध्याय है।
राज्यपाल के रूप में अब उनकी भूमिका ओडिशा में संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन की होगी। उनके राजनीतिक अनुभव और संसदीय पृष्ठभूमि के बीच इस नई जिम्मेदारी पर सभी की नजरें रहेंगी।


