रांची: राजधानी रांची के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास की दिशा में पहल की जा रही है। कल्याण विभाग की योजना के तहत करीब 17 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से 92 धार्मिक स्थलों का विकास किया जाएगा। इनमें सरना स्थल, जाहेर स्थान, हड़गड़ी और मसना जैसे जनजातीय समुदाय के पारंपरिक एवं पवित्र स्थल शामिल हैं।
धार्मिक स्थलों की होगी घेराबंदी
योजना के तहत सभी चयनित धार्मिक स्थलों की घेराबंदी की जाएगी। इसके साथ ही वहां जरूरी आधारभूत सुविधाओं का निर्माण भी किया जाएगा, ताकि इन स्थलों का संरक्षण हो सके और स्थानीय समुदाय के लोग आसानी से पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित कर सकें।
सरना स्थल और जाहेर स्थान आदिवासी समुदाय की प्रकृति पूजा और धार्मिक परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थल हैं। वहीं, मसना और हड़गड़ी का जनजातीय समाज की मृत्यु संस्कार परंपराओं में विशेष महत्व है।
बैठने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की होगी व्यवस्था
धार्मिक स्थलों के विकास के दौरान लोगों के उठने-बैठने की व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य इन स्थलों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।
75 लाख की लागत से बनेंगे तीन धुमकुड़िया भवन
धार्मिक स्थलों के विकास के साथ रांची क्षेत्र में तीन धुमकुड़िया भवनों का भी निर्माण किया जाएगा। कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, ये भवन कांके के बिशुनपुर चेड़ी और खलारी क्षेत्र के होयरंबा टोंगरी समेत निर्धारित स्थानों पर बनाए जाएंगे।
तीनों भवनों के निर्माण पर करीब 75 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रत्येक भवन के लिए लगभग 25 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
सरकारी और गैरमजरुआ जमीन पर होगा निर्माण
योजना के अनुसार, धार्मिक स्थलों और धुमकुड़िया भवनों का निर्माण सरकारी एवं गैरमजरुआ जमीन पर किया जाएगा। इन परियोजनाओं के माध्यम से जनजातीय समुदाय के पारंपरिक धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखने और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।


