झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, बर्खास्त जेल क्लर्क महेंद्र राम की सजा पर फिर से विचार करें अधिकारी

झारखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त जेल क्लर्क महेंद्र राम की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए, सजा की मात्रा पर छह सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है।

Razi Ahmad
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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त जेल क्लर्क महेंद्र राम की अपील पर सुनवाई करते हुए सजा की मात्रा पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया है। अदालत ने विभागीय जांच में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, लेकिन बर्खास्तगी की सजा को लेकर अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने संबंधित अपीलीय प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि वह मामले में उठाए गए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार करते हुए छह सप्ताह के भीतर नया निर्णय ले।

क्या है पूरा मामला?

महेंद्र राम की नियुक्ति वर्ष 1983 में हजारीबाग केंद्रीय जेल में सिपाही के पद पर हुई थी। वर्ष 1999 में उन्हें क्लर्क बनाया गया। वर्ष 2013 में उनका तबादला गोड्डा मंडल कारा में किया गया, जहां उन्हें सहायक अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।

विभागीय जांच के अनुसार, अप्रैल और मई 2013 में मेसर्स साहेब ट्रेडर्स को कुल 5,81,443 रुपये का कथित अधिक भुगतान किया गया। वहीं, जून 2013 में मेसर्स इशरत एंटरप्राइजेज को 62,336 रुपये का अधिक भुगतान किए जाने की बात सामने आई थी।

2016 में सेवा से किए गए थे बर्खास्त

मामले में मार्च 2016 में महेंद्र राम को निलंबित कर आरोप-पत्र दिया गया था। विभागीय जांच के बाद 28 नवंबर 2016 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वर्ष 2019 में उनकी विभागीय अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे 2022 में एकल पीठ ने खारिज कर दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने खंडपीठ में अपील की थी।

बचाव पक्ष ने सजा को बताया अनुपातहीन

महेंद्र राम की ओर से अधिवक्ता शिल्पी गाड़ोदिया ने दलील दी कि इसी मामले में तत्कालीन प्रभारी अधीक्षक को विभागीय कार्यवाही में दोषमुक्त कर दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि जिन फर्मों को अधिक भुगतान हुआ था, उन्होंने राशि वापस कर दी थी। ऐसे में बर्खास्तगी की सजा आरोपों की तुलना में अत्यधिक कठोर है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से एएजी-III आशुतोष आनंद ने विभागीय जांच का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जांच में प्रक्रियागत खामी नहीं थी और महेंद्र राम को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। राज्य की ओर से स्टॉक रजिस्टर में कटिंग, ओवरराइटिंग और व्हाइटनर के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया।

दोषसिद्धि में हस्तक्षेप से कोर्ट का इनकार

हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक समीक्षा के दौरान अदालत का काम जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधता देखना है, न कि हर मामले में साक्ष्यों का नए सिरे से मूल्यांकन करना।

पीठ ने पाया कि विभागीय जांच में कोई ऐसी प्रक्रियागत खामी नहीं थी, जिसके आधार पर दोषसिद्धि में हस्तक्षेप किया जाए। ब्लैकलिस्ट की गई फर्म को भुगतान और रजिस्टर में कथित छेड़छाड़ जैसे बिंदुओं के आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

सजा की मात्रा पर दोबारा विचार क्यों?

सजा के सवाल पर अदालत ने अलग रुख अपनाया। पीठ ने कहा कि मामले में महेंद्र राम को अकेले जिम्मेदार मानने के पहलू पर विचार जरूरी है, क्योंकि प्रभारी अधीक्षक की भूमिका भी सामने आई थी और उन्हें विभागीय कार्यवाही में दोषमुक्त कर दिया गया था।

अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि अधिक भुगतान की राशि संबंधित फर्मों ने वापस कर दी थी। साथ ही, अनुशासनिक और अपीलीय प्राधिकारियों ने इन परिस्थितियों पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। वर्ष 2019 के अपीलीय आदेश में सजा की मात्रा पर भी स्पष्ट चर्चा नहीं की गई थी।

छह सप्ताह में नया फैसला लेने का निर्देश

हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को उस सीमा तक रद्द कर दिया, जिसमें बर्खास्तगी की सजा की मात्रा को सही ठहराया गया था। मामला गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव के पास वापस भेज दिया गया है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित अपीलीय प्राधिकारी आदेश की प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर केवल सजा की मात्रा पर नए सिरे से निर्णय लें और इस दौरान हाईकोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखें।

महत्वपूर्ण बात: हाईकोर्ट ने महेंद्र राम को दोषमुक्त नहीं किया है और न ही उनकी बर्खास्तगी तत्काल रद्द की है। अदालत ने केवल सजा की मात्रा पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।