ट्रैफिक चालान भुगतान व्यवस्था ध्वस्त, सरकारी पोर्टल ठप होने से 150 रुपये के चालान पर थर्ड पार्टी वसूल रही 350

रांची में ई-चालान पोर्टल की खराबी से वाहन चालक परेशान, निजी ऐप्स पर 150 रुपये के चालान के लिए 446 रुपये तक वसूली और साइबर ठगी का खतरा बढ़ा।

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रांची: राजधानी में यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगातार सख्ती बरती जा रही है, लेकिन चालान के भुगतान की सरकारी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आंकड़े बताते हैं कि रांची में हर महीने औसतन 1,02,357 चालान काटे जा रहे हैं, परंतु चालान जमा करने के लिए लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि शहर में करोड़ों रुपये का चालान बकाया पड़ा हुआ है।

सरकारी पोर्टल की नाकामी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ

झारखंड सरकार का ई-चालान पोर्टल (echallan.jhpolice.gov.in) और केंद्र सरकार का परिवहन पोर्टल (echallan.parivahan.gov.in) बीते लगभग छह महीनों से ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। पोर्टल्स पर कभी ‘कैप्चा’ कोड नहीं आता, तो कभी ‘नो पेंडिंग रिकॉर्ड फाउंड’ का संदेश दिखता है। सरकारी सिस्टम की इस खराबी के कारण वाहन चालकों को मजबूरन ‘थर्ड पार्टी’ (निजी) ऐप्स और वेबसाइट्स का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी पोर्टल पर चालान भुगतान करने के एवज में सेवा शुल्क (सर्विस चार्ज), सेटलमेंट फीस और 18% जीएसटी के नाम पर भारी अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। उदाहरण के तौर पर, 150 रुपये के चालान के भुगतान के लिए उपभोक्ता से 350 रुपये से लेकर 446 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

कोर्ट और दफ्तर के चक्कर

सरकारी पोर्टल पर बार-बार प्रयास करने के बावजूद चालान न जमा होने की स्थिति में निर्धारित समय सीमा समाप्त हो जाती है। इसके बाद मामला स्वतः कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसके बाद वाहन चालकों को कोर्ट से अनुमति लेकर रांची स्थित ट्रैफिक कार्यालय के काउंटर पर जाकर चालान की राशि जमा करनी पड़ती है, जहां उन्हें घंटों लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है।

साइबर ठगी का खतरा

सरकारी और निजी व्यवस्था की इस गड़बड़ी के बीच एक बड़ा खतरा लोगों की प्राइवेसी पर मंडरा रहा है। चालान कटने के बाद वाहन चालकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर थर्ड पार्टी पोर्टल्स द्वारा बार-बार मैसेज भेजे जा रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि नागरिकों का निजी डेटा लीक हो चुका है। साइबर ठग भी इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। वे चालान रद्द होने या कोर्ट की कार्रवाई की धमकी देकर लोगों को संदिग्ध लिंक और ‘एपीके’ (APK) फाइल भेज रहे हैं, जिससे लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं।

इस मामले में परिवहन आयुक्त संजीव बेसरा ने कहा कि आम लोगों को चालान के भुगतान में आ रही परेशानी और थर्ड पार्टी ऐप्स द्वारा भेजे जा रहे मैसेजों की शिकायतें मिली हैं। अतिरिक्त शुल्क वसूली को लेकर एनआईसी को पत्र लिखा गया है। झारखंड सरकार के ई-चालान पोर्टल में आ रही तकनीकी खराबी (सर्वर डाउन) को दुरुस्त करने के लिए तेजी से काम कराया जा रहा है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।