झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में विधि अधिकारियों की नियुक्ति से जुड़े नियम 3(7) को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि यह प्रावधान अस्पष्ट और मनमाना है तथा संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने नियुक्ति से संबंधित अन्य प्रमुख नियमों और विधि अधिकारियों के पदों की संख्या निर्धारित करने के सरकार के अधिकार को बरकरार रखा है।
फैसले की 5 अहम बातें
– नियम 3(7) निरस्त: हाईकोर्ट ने संबंधित प्रावधान को मनमाना और समानता के संवैधानिक अधिकार के विरुद्ध माना।
– अन्य नियम बरकरार: नियम 6 और 9 को वैध ठहराते हुए अदालत ने उन्हें रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की।
– कुल 81 विधि अधिकारियों के पद: राज्य सरकार के अनुसार, इनमें 66 बहस करने वाले अधिवक्ता और 15 विधि शोध अधिकारी शामिल हैं।
– पारिश्रमिक पर तीन महीने में फैसला: कोर्ट ने विधि शोध अधिकारियों के मासिक पारिश्रमिक पर राज्य सरकार को पुनर्विचार कर तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
– अन्य याचिकाएं खारिज: पदों की संख्या तय करने के सरकार के अधिकार और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी अन्य चुनौतियों को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
नियुक्ति प्रक्रिया पर क्या पड़ेगा असर?
हाईकोर्ट के इस फैसले से विधि अधिकारियों की नियुक्ति व्यवस्था पूरी तरह निरस्त नहीं हुई है। अदालत ने केवल नियम 3(7) को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया है, जबकि अन्य प्रमुख नियम प्रभावी बने हुए हैं।
वहीं, विधि शोध अधिकारियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी होगी या नहीं, यह राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। अदालत ने सीधे वेतन या फीस बढ़ाने का आदेश नहीं दिया, बल्कि सरकार को इस विषय पर तीन महीने के भीतर पुनर्विचार कर फैसला लेने को कहा है।
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- फैसले की 5 अहम बातें
- – नियम 3(7) निरस्त: हाईकोर्ट ने संबंधित प्रावधान को मनमाना और समानता के संवैधानिक अधिकार के विरुद्ध माना।
- – अन्य नियम बरकरार: नियम 6 और 9 को वैध ठहराते हुए अदालत ने उन्हें रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की।
- – कुल 81 विधि अधिकारियों के पद: राज्य सरकार के अनुसार, इनमें 66 बहस करने वाले अधिवक्ता और 15 विधि शोध अधिकारी शामिल हैं।
- – पारिश्रमिक पर तीन महीने में फैसला: कोर्ट ने विधि शोध अधिकारियों के मासिक पारिश्रमिक पर राज्य सरकार को पुनर्विचार कर तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
- – अन्य याचिकाएं खारिज: पदों की संख्या तय करने के सरकार के अधिकार और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी अन्य चुनौतियों को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
- नियुक्ति प्रक्रिया पर क्या पड़ेगा असर?


