जमशेदपुर: झारखंड के चाकुलिया स्थित गौशाला में गाय के गोबर और मिट्टी से तैयार किए जा रहे पर्यावरण अनुकूल दीये अब देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। इस बार इन दीयों की मांग अमेरिका तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर को रोशन करने के लिए गौशाला को 5,000 दीयों का ऑर्डर मिला है।

चाकुलिया गौशाला ने इस वर्ष दीपावली के अवसर पर 50 हजार दीये तैयार करने का लक्ष्य रखा है। गौशाला के सचिव आलोक लोधा के अनुसार, यहां तैयार दीये कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु, जमशेदपुर, रांची और पटना समेत देश के कई बड़े शहरों में भेजे जाएंगे। अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने भी इन दीयों की मांग की है और वहां आपूर्ति की तैयारी की जा रही है।

20 मजदूर रोजाना तैयार कर रहे दीये
गौशाला में दीपावली से पहले ही दीये बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। करीब 20 मजदूर प्रतिदिन इनके निर्माण में जुटे हैं। गोबर और मिट्टी के मिश्रण को विशेष सांचे में डालकर दीये का आकार दिया जाता है। इसके बाद उन्हें धूप में सुखाया जाता है और आयुर्वेदिक रंगों से सजाया जाता है। इन दीयों की खासियत है कि इनमें तेल भरने के बाद ये करीब दो से ढाई घंटे तक जलते हैं। सांचे में तैयार होने के कारण इन पर आकर्षक नक्काशी भी उभरती है।
दीपावली के बाद पौधों के लिए बनेंगे खाद
इन गोबर-मिट्टी से बने दीयों की सबसे बड़ी विशेषता इनका पर्यावरण अनुकूल होना है। दीपावली के बाद इन्हें फेंकने की जरूरत नहीं होगी। इन्हें तोड़कर मिट्टी के गमलों में डालने पर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पौधों को पोषण मिलेगा और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा।
झारखंड समेत कई राज्यों में हो रही आपूर्ति
चाकुलिया गौशाला में तैयार दीयों की मांग झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में है। दीयों को 10 के पैकेट में बाजार तक पहुंचाया जा रहा है, जिसकी कीमत 50 रुपये रखी गई है। चाकुलिया में तैयार ये स्वदेशी और पर्यावरण अनुकूल दीये इस दीपावली पर देश के कई शहरों के घर-आंगन के साथ अयोध्या के राम मंदिर को भी रोशन करेंगे।


