मुंबई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई (आईआईटी-मुंबई) के दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता ने मुंबई उच्च न्यायालय का रुख कर अपने बेटे की मौत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या विशेष जांच दल (एसआईटी) से स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। रवींद्र और सोनाली वाकोडे द्वारा वकील हितेंद्र गांधी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि उनके 20 वर्षीय बेटे ने जाति के आधार पर अपमानित किये जाने के बाद आत्महत्या कर ली। याचिका का सोमवार को उल्लेख किए जाने की संभावना है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने इस मामले की उतनी गंभीरता से जांच नहीं की, जितनी जरूरी थी। इसलिए, इसमें अनुरोध किया गया है कि जांच की निगरानी किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाए। शिकायत के आधार पर, पवई पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और अन्य आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया था। याचिका में संस्थान को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे उस दिन के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखें। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि उस दिन, जब उनके बेटे ने आत्महत्या की, वहां मौजूद किसी भी छात्र या संकाय सदस्य को कोई प्रभावित न कर सके।

आईआईटी-मुंबई के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को मौत हो गई थी। उसके माता-पिता का दावा है कि कुछ संकाय सदस्यों और निरीक्षक ने साहिल के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद उसने आत्महत्या कर ली। याचिका में माता-पिता ने बताया कि आईआईटी में कमरा मिलने के बाद, साहिल डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर लगाना चाहता था, लेकिन उसके साथ कमरे में रहने वाले अन्य छात्रों ने उसे ऐसा न करने की सलाह दी।
याचिका के अनुसार, जब साहिल ने अपने माता-पिता को यह बात बताई, तो उन्होंने भी उसे सलाह दी कि किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए वह तस्वीर न लगाए।इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि साहिल को प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला की ओर से जाति-आधारित टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा था। 18 सितंबर को हुई परीक्षा के दौरान वह निरीक्षक भी थे।


