सड़क पर अचानक आ गया 45 हाथियों का झुंड! सेल्फी और वीडियो बनाने की होड़, बच्चों की जान भी खतरे में

पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी में 45 हाथियों का झुंड सड़क पार करते दिखा, जिसे देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने जान जोखिम में डालकर सेल्फी और वीडियो बनाए।

Razi Ahmad
3 Min Read
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Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 45 हाथियों का झुंड सड़क पार करता नजर आया। हाथियों को देखने के लिए मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। कई लोग अपनी जान की परवाह किए बिना हाथियों के करीब जाकर फोटो और वीडियो बनाने लगे। हैरानी की बात यह रही कि हाथियों के जंगल की ओर जाने के बाद भी कुछ लोग उनका पीछा करते नजर आए। भीड़ में बच्चे भी शामिल थे।

हाथियों के करीब जाकर बना रहे थे फोटो-वीडियो

घटना नोवामुंडी वन क्षेत्र के लेपांग-भंन गांव मुख्य मार्ग की है। शनिवार को करीब 45 हाथियों का झुंड सड़क पार कर रहा था। हाथियों को देखते ही लोग उन्हें कैमरे में कैद करने के लिए जुट गए।

कुछ लोग हाथियों के काफी करीब जाकर तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे। इससे स्थिति और खतरनाक हो गई। झुंड के जंगल की ओर बढ़ने के बाद भी कुछ लोग उसका पीछा करते रहे। ऐसे में हाथियों के अचानक आक्रामक होने पर बड़ा हादसा हो सकता था।

वन विभाग की अपील, हाथियों से रहें दूर

वन विभाग ने लोगों से हाथियों के झुंड से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। विभाग का कहना है कि हाथियों के पास जाना, उनका रास्ता रोकना या उनका पीछा करना बेहद खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों को परेशान करने या उनके करीब जाने से वे विचलित हो सकते हैं। इसलिए झुंड दिखाई देने पर भीड़ लगाने और फोटो-वीडियो बनाने के बजाय सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।

खेतों में खड़ी फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता

नोवामुंडी वन क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में हाथियों की लगातार आवाजाही से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। भोजन की तलाश में हाथियों के खेतों की ओर पहुंचने से खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों के सामने एक तरफ अपनी फसल बचाने और दूसरी तरफ हाथियों से खुद को सुरक्षित रखने की चुनौती है।

आखिर कहां जाएं हाथी? सिमटते जंगल और कॉरिडोर भी बड़ी वजह

मानव-हाथी संघर्ष के बीच हाथियों के प्राकृतिक आवास और पारंपरिक विचरण मार्गों का सिमटना भी गंभीर चिंता का विषय है। झारखंड और ओडिशा के बीच हाथियों की आवाजाही के दौरान उन्हें सुरक्षित ठिकानों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

जंगलों का सिकुड़ना और हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर में बाधा आना इंसानों और हाथियों के बीच टकराव की अहम वजहों में शामिल है। ऐसे में केवल हाथियों को एक इलाके से दूसरे इलाके में खदेड़ना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उनके प्राकृतिक आवास और पारंपरिक रास्तों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।