एसआईआर के बाद पांच चुनावी राज्यों में मतदाताओं की संख्या 13.24 प्रतिशत तक घटी

एसआईआर प्रक्रिया के बाद पांच राज्यों में मतदाताओं की संख्या 2.29 करोड़ घटी। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 13.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, 2027 चुनाव से पहले।

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाताओं की संख्या में 13.24 प्रतिशत तक की कमी आई है। आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। इन पांच राज्यों में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल में निर्वाचन आयोग और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन पांच राज्यों में मतदाताओं की संख्या एसआईआर से पहले लगभग 18.71 करोड़ थी, जो घटकर 16.43 करोड़ रह गई। इस तरह कुल मिलाकर करीब 2.29 करोड़ मतदाताओं की कमी आई, जो लगभग 12.2 प्रतिशत है। राज्यों में सबसे अधिक मतदाताओं वाले उत्तर प्रदेश में ही कुल गिरावट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया।

उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण में एसआईआर कराया गया था। यहां मतदाताओं की संख्या एसआईआर से पहले 15.44 करोड़ थी, जो मसौदा मतदाता सूची में घटकर 12.56 करोड़ रह गई और अंतिम मतदाता सूची में बढ़कर 13.40 करोड़ हो गई। इस तरह मतदाताओं की शुद्ध संख्या में करीब 2.04 करोड़ यानी 13.24 प्रतिशत की कमी आई, जो इन पांच राज्यों में सबसे अधिक है। मसौदा सूची से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए गए थे, जिनमें से लगभग 0.84 करोड़ (करीब 29 प्रतिशत) नाम दोबारा शामिल किए गए। पंजाब में तीसरे चरण में एसआईआर कराया गया था। यहां मतदाताओं की संख्या 2.15 करोड़ से घटकर मसौदा सूची में 1.94 करोड़ रह गई और अंतिम सूची में बढ़कर 2.01 करोड़ हो गई। इस तरह मतदाताओं की संख्या में करीब 0.14 करोड़ यानी 6.34 प्रतिशत की शुद्ध कमी आई।

इन पांच राज्यों में पंजाब में हटाए गए नामों की सबसे अधिक वापसी दर्ज की गई। मसौदा सूची से हटाए गए करीब 0.21 करोड़ नामों में से लगभग 0.07 करोड़ (करीब 34 प्रतिशत) नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए गए। उत्तराखंड में, जहां मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तीसरे चरण में हुआ था, मतदाताओं की संख्या 0.80 करोड़ से घटकर 0.71 करोड़ रह गई और नाम फिर से जोड़ने के बाद अंततः 0.72 करोड़ हो गई। मतदाताओं की संख्या में कुल कमी लगभग 0.08 करोड़ या 10.07 प्रतिशत रही। मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए नामों में से केवल लगभग 0.0025 करोड़ नाम ही दोबारा जोड़े गए, जो कुल हटाए गए नामों का करीब तीन प्रतिशत है।

मणिपुर में भी एसआईआर तीसरे चरण में हुआ था। वहां मतदाताओं की संख्या 0.209 करोड़ से घटकर 0.193 करोड़ रह गई और अंत में 0.196 करोड़ हो गई। मतदाताओं की संख्या में कुल शुद्ध कमी लगभग 0.013 करोड़ या 6.33 प्रतिशत रही, जो पंजाब के समान है। आंकड़ों के अनुसार, मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए नामों में से करीब 17 प्रतिशत नाम बहाल किए गए। गोवा में एसआईआर दूसरे चरण में हुआ था। वहां मतदाताओं की संख्या 0.1185 करोड़ से घटकर 0.1085 करोड़ रह गई और फिर और कम होकर 0.1058 करोड़ हो गई। गोवा में मतदाताओं की संख्या में कुल कमी लगभग 0.013 करोड़ या 10.76 प्रतिशत रही। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि 60 सदस्यीय मणिपुर, 40 सदस्यीय गोवा, 117 सदस्यीय पंजाब और 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों को समाप्त होगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत निर्वाचन आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले भी चुनाव कराने की अनुमति है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।