आखिर क्यों 65 साल तक नौकरी करना चाहते हैं पशु चिकित्सक?
दरअसल, झारखंड के पशु चिकित्सक लंबे समय से एलोपैथिक चिकित्सकों की तरह सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें DACP यानी डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन का लाभ देने की मांग भी की गई थी।
इसी मांग को लेकर डॉ. मृत्युंजय कुमार और अन्य ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
2024 में एकल पीठ ने दिया था पशु चिकित्सकों के पक्ष में आदेश
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने 26 नवंबर 2024 को अहम आदेश पारित किया था।
इस आदेश में पशु चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति उम्र एलोपैथिक चिकित्सकों के समान 65 वर्ष करने और उन्हें DACP का लाभ देने का निर्देश दिया गया था।
इस फैसले से राज्य के पशु चिकित्सकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी थी।
राज्य सरकार हाईकोर्ट क्यों पहुंची?
एकल पीठ के आदेश से असहमत राज्य सरकार ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी।
सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय, अधिवक्ता अशोक यादव, अधिवक्ता विभोर मयंक और अधिवक्ता अभिजीत आनंद ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार की नीतियों का निर्धारण न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
राज्य सरकार की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी।
अब दिसंबर में होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के इस आदेश का असर राज्य में कार्यरत 450 से अधिक पशु चिकित्सकों पर पड़ सकता है।
फिलहाल 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति उम्र और DACP का लाभ देने संबंधी एकल पीठ के आदेश पर रोक लगी हुई है। दिसंबर में होने वाली अगली सुनवाई में मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
क्या पशु चिकित्सकों को फिर मिलेगी 65 साल तक नौकरी की राहत?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिसंबर में होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट क्या फैसला सुनाता है। क्या पशु चिकित्सकों को भी एलोपैथिक चिकित्सकों की तरह 65 वर्ष तक सेवा देने का लाभ मिलेगा या राज्य सरकार की अपील पर एकल पीठ का आदेश निरस्त हो जाएगा?
फिलहाल इस मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है और राज्य के 450 से अधिक पशु चिकित्सकों की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।


