JPSC News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष का पद 21 जुलाई से ही खाली पड़ा है। बता दें, विवादों से घिरने के बाद तत्कालीन पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद एक के बाद एक 9 अगस्त को आयोग के तीन और सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। उसके बाद से ही आयोग का कामकाज लगभग ठप पड़ा है। जिसका सीधा असर परीक्षाओं और सरकारी कर्मचारियों के प्रन्नोति पर दिख रहा है।

JPSC News: हाईकोर्ट में 19 नवंबर को इस मामले पर फिर से सुनवाई
जबकि, 6 अगस्त को परीक्षा से संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि, JPSC एक संवैधानिक संस्था है और इसके अध्यक्ष का पद लंबे वक्त तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। इसके बाद 10 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की पीठ ने झारखंड सरकार को दो महीने के अंदर जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का निर्देश दिया था। इसको लेकर अदालत ने सरकार से 18 नवंबर तक रिपोर्ट मांगी है। वहीं, 19 नवंबर को इस मामले पर फिर से सुनवाई होनी है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद कई बार आयोग के पुनर्गठन के संकेत दिए, लेकिन फिलहाल तक ना अध्यक्ष की और ना ही सदस्यों की नियुक्ति हो सकी है।

2 महीने से अधिक हो जाने के बाद भी कमेटी का काम नहीं हुआ पूरा
जेपीएससी और जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, गड़बड़ियों और अनियमितताओं को दूर करने के लिए सरकार ने 18 अगस्त को एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का निर्णय लिया था। जिसकी अध्यक्षता IAS अधिकारी अमिताभ कौशल को सौंपी गई थी। इस संबंध में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा अधिसूचना भी जारी की गई थी।
इस कमेटी को प्रभावी और फंक्शन बनाने के लिए प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाना था और कई अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जानी थी। 18 अगस्त को जारी हुई अधिसूचना में IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की टीम से दो महीने के भीतर राज्य सरकार ने रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन, 2 महीने से अधिक हो जाने के बाद भी यह उच्चस्तरीय कमेटी पूरी तरह अपना काम शुरु नहीं कर सकी। जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार और नई गाइडलाइन बनाने का काम भी अटक कर रह गया। और छात्र संगठन भी चुप्पी साधे बैठे है।
JPSC के ठप रहने से नौ परीक्षाओं पर पड़ रहा सीधा असर
JPSC News: जेपीएससी के ठप रहने की वजह से लगभग दो दर्जन से अधिक परीक्षाएं प्रभावित है। रद्द प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। आयोग के दोबारा काम शुरू करने के बाद ही स्थगित की गयी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इनमें प्रमुख रूप संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025, संयुक्त सिविल सेवा मुख्यपरीक्षा-2023,संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 (बैकलॉग), सिविल जज (जूनियर डिवीजन) लिखित परीक्षा,सहायक लोक अभियोजक (बैकलॉग), कारखाना निरीक्षक लिखित परीक्षा,प्रोजेक्ट मैनेजर लिखित परीक्षा, सहायक लोक अभियोजक (नियमित), वाष्पित्र निरीक्षक (Boiler Inspector) की परीक्षा शामिल हैं।
विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की प्रोन्नति पर भी असर
जेपीएससी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करने के अलावा क्लास-वन रैंक के अधिकारियों और विश्वविद्यालय के विभिन्न रैंक के व्याख्याताओं की प्रोन्नति से जुड़े मामलों में भी अपनी अनुशंसा देता है। लेकिन आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के नहीं रहने के कारण एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति अटकी हुई है। इसी तरह साल 2008 बैच के कई शिक्षकों की प्रोन्नति प्रभावित है।


