आरोग्य, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है धनतेरस : संजय सर्राफ

धनतेरस का पावन पर्व लाता है सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली का संदेश, भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा से जीवन में सकारात्मकता और मंगलकामनाओं का संचार होता है।

Archana Ekka
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रांची : झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं मंगलकारी पर्व है। दीपावली महापर्व का शुभारंभ इसी दिन से होता है। इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन धन, आरोग्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक तथा देवताओं का वैद्य माना जाता है।

इसलिए इस दिन उनकी पूजा-अर्चना कर परिवार के सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरोगी जीवन की कामना की जाती है। इसी दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विशेष विधान है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था। जब उनकी पत्नी को यह बात पता चली तो उन्होंने पति की रक्षा के लिए महल के द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों तथा दीपों का ढेर लगा दिया। पूरी रात गीत-संगीत और कथाओं के माध्यम से पति को जगाए रखा। जब यमराज सर्प का रूप धारण कर वहां पहुंचे तो दीपों के प्रकाश और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वे राजकुमार के प्राण लिए बिना लौट गए। इस प्रकार राजकुमार का जीवन बच गया। तभी से धनतेरस पर दीपदान करने की परंपरा प्रचलित हुई।

इस दिन घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर दीप जलाए जाते हैं। सोना, चांदी, नए बर्तन तथा अन्य धातुओं की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। संध्याकाल में विधि-विधान से लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। परिवार की सुख-समृद्धि एवं अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए यमदेव के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान भी किया जाता है।धनतेरस हमें सिखाता है कि वास्तविक धन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य, सद्भाव, संतोष और सुखी परिवार भी है। इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता, दान-पुण्य तथा स्वच्छता का संकल्प लेना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी के दीप जलाकर प्रदूषण रहित उत्सव मनाना चाहिए। यह पर्व आरोग्य, समृद्धि, सेवा और सकारात्मक जीवन का संदेश देता है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।